रुद्रप्रयाग, 12 दिसम्बर (स.ह.) : प्रदेश में सबसे लंबी सड़क सुरंग सोनप्रयाग से कालीमठ के बीच बनाई जाएगी। सुरंग के निर्माण को राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण खंड-लोनिवि ने सर्वेक्षण के लिए निविदा आमंत्रित की है। इस सुरंग के बनने से जहां केदारनाथ यात्रा आसान हो जाएगी, वहीं गौरीकुंड राजमार्ग पर जाम से निजात भी मिल सकेगी। खासकर स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी मुहैया होंगे।

जून 2013 की केदारनाथ आपदा के बाद से केदारनाथ यात्रा को आसान बनाने के लिए निरंतर प्रयास जारी हैं। केदारनाथ यात्रा को सड़क मार्ग से सुलभ करने के लिए कालीमठ घाटी से जोड़ा जा रहा है। इसके लिए सोनप्रयाग से कालीमठ तक 7 किमी लंबी सुरंग बनाई जानी है, जो सड़क मार्ग पर उत्तराखंड की सबसे लंबी सुरंग होगी। इस सुरंग के सर्वेक्षण के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण खंड-लोनिवि, रुद्रप्रयाग डिविजन ने निविदाएं आमंत्रित की हैं। सुरंग के साथ ही कालीमठ से चुन्नी बैंड तक 16 किमी लंबा बाईपास भी बनाया जाएगा। इस सुरंग व बाईपास के बनने से जहां केदारनाथ यात्रा में रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहनों का दबाव कम होगा। वहीं, कालीमठ घाटी के धार्मिक व पर्यटक स्थलों को भी पहचान मिलेगी। प्रस्तावित सुरंग के निर्माण पर 2200 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। सर्वेक्षण के बाद सुरंग निर्माण के लिए अंतिम डीपीआर तैयार की जाएगी।
सोनप्रयाग से कालीमठ तक सुरंग निर्माण और कालीमठ से चुन्नी बैंड तक बाईपास निर्माण को लेकर उत्तराखंड के मुख्य सचिव डा. एसएस संधू बीते अप्रैल माह में हेलीकाॅप्टर से क्षेत्र का हवाई सर्वेक्षण कर चुके हैं। इस दौरान उन्होंने जिला प्रशासन को कई सुझाव भी दिए थे, जिसे लेकर एनएच से चर्चा भी की गई थी।
सोनप्रयाग-कालीमठ प्रस्तावित सात किमी लंबी सुरंग के सर्वेक्षण के लिए निविदा आमंत्रित की जा चुकी हैं। साथ ही संबंधित सभी प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं, जिससे एजेंसी के माध्यम से सर्वे किया जाएगा। वन भूमि हस्तांतरण सहित अन्य औपचारिकताओं के पूरा होने के बाद अगले तीन-चार वर्षों में सुरंग निर्माण शुरू हो जाएगा।

यह जानकारी निर्भय सिंह, अधिशासी अभियंता, राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण खंड लोनिवि रुद्रप्रयाग के द्वारा प्राप्त हुई है।

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