हेल्थ एंड फिटनेस
अक्सर लोग चीनी से बचने के लिए डाइट ड्रिंक, शुगर-फ्री मिठाइयों या कम कैलोरी वाले प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं। इन्हें सेहत के लिए बेहतर विकल्प माना जाता है, लेकिन अब यूनिवर्सिटी ऑफ कैम्ब्रिज के वैज्ञानिकों की एक स्टडी बताती है कि ये स्वीटनर्स हमारी आंतों में रहने वाले अच्छे बैक्टीरिया पर असर डाल सकते हैं।
आधुनिक जीवनशैली में पीठ दर्द, कंधों की जकड़न और मानसिक तनाव एक आम समस्या बन गई है। ऐसे में आकर्ण धनुरासन एक अचूक और प्रभावी योगासन की तरह काम करता है।
आज की तेज रफ्तार जिंदगी में हमारी कई आदतें बदल गई हैं। घंटों तक ऑफिस में बैठकर काम करना, लगातार मोबाइल चलाना और कम चलना-फिरना आम हो गया है।
बहुत से लोग दिमाग को तेज रखने और याददाश्त बेहतर करने के लिए फिश ऑयल कैप्सूल लेते हैं। इसकी वजह है इसमें मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड, खासकर डीएचए जिसे दिमाग की सेहत के लिए जरूरी माना जाता है।
प्रेग्नेंसी के नौ महीनों में महिला के शरीर के अंदर कई बदलाव होते हैं। इन बदलावों का असर सिर्फ सेहत पर ही नहीं, बल्कि चेहरे और त्वचा पर भी दिखाई देता है।
टाइप-2 डायबिटीज की चपेट में आने का जोखिम सिर्फ शरीर के बढ़े हुए वजन या मोटापे तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें मांसपेशियों की सेहत भी एक बेहद अहम भूमिका निभाती है। ऑस्ट्रेलिया की कर्टिन यूनिवर्सिटी की अगुवाई में हुए एक नए शोध से यह सामने आया है कि जिन लोगों में शरीर की अतिरिक्त चर्बी के साथ-साथ मांसपेशियां कमजोर होती हैं, उनमें इस बीमारी का खतरा काफी ज्यादा बढ़ जाता है।
मुंह में होने वाले छाले छोटे जरूर होते हैं लेकिन इनकी वजह से होने वाली परेशानी काफी ज्यादा हो सकती है। ये खाने, बोलने और पानी पीने में भी दर्द पैदा करते हैं।
कॉफी पीना पसंद करने वालों के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है। एक नए अध्ययन में पाया गया है कि नियमित रूप से कॉफी पीने वाले लोगों में गंभीर लिवर बीमारी का खतरा कम होता है।
वर्तमान समय में हर व्यक्ति अपने बालों को सुंदर और आकर्षक लुक देना चाहता है। चाहे किसी विशेष अवसर पर जाना हो अथवा दैनिक रूप को बदलना हो, लोग तरह-तरह के हेयरस्टाइल अपना रहे हैं।
सामान्य सिरदर्द की तुलना में माइग्रेन का दर्द काफी भिन्न होता है, जिसमें सिर के किसी एक हिस्से में होने वाली तीव्र पीड़ा कई घंटों तक बनी रह सकती है। यद्यपि इस बीमारी के उपचार के लिए मुख्य रूप से दवाओं का सहारा लिया जाता है, परंतु वैज्ञानिक शोधों के अनुसार कुछ प्राकृतिक तरीकों से भी इसके लक्षणों को कम किया जा सकता है।
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