गैस, सूजन और मानसिक तनाव बढ़ाते हैं माइग्रेन, जानें इसे नियंत्रित करने में अजवाइन के फायदे
सामान्य सिरदर्द की तुलना में माइग्रेन का दर्द काफी भिन्न होता है, जिसमें सिर के किसी एक हिस्से में होने वाली तीव्र पीड़ा कई घंटों तक बनी रह सकती है। यद्यपि इस बीमारी के उपचार के लिए मुख्य रूप से दवाओं का सहारा लिया जाता है, परंतु वैज्ञानिक शोधों के अनुसार कुछ प्राकृतिक तरीकों से भी इसके लक्षणों को कम किया जा सकता है।

नई दिल्ली, 12 जुलाई । सामान्य सिरदर्द की तुलना में माइग्रेन का दर्द काफी भिन्न होता है, जिसमें सिर के किसी एक हिस्से में होने वाली तीव्र पीड़ा कई घंटों तक बनी रह सकती है। यद्यपि इस बीमारी के उपचार के लिए मुख्य रूप से दवाओं का सहारा लिया जाता है, परंतु वैज्ञानिक शोधों के अनुसार कुछ प्राकृतिक तरीकों से भी इसके लक्षणों को कम किया जा सकता है। इन असरदार घरेलू उपायों में अजवाइन का इस्तेमाल भी शामिल है।
यह मूल रूप से एक न्यूरोलॉजिकल समस्या है, जिसके अंतर्गत मस्तिष्क की नसों और उनसे जुड़े रसायनों में होने वाले बदलावों के कारण दर्द की प्रक्रिया शुरू होती है। माइग्रेन का यह दर्द कई बार 4 घंटे से लेकर 72 घंटे तक भी रह सकता है। कुछ लोगों में हार्मोनल परिवर्तन, तनाव, भूखे रहना, कम पानी पीना या कुछ खाद्य पदार्थ भी माइग्रेन को ट्रिगर कर सकते हैं। यही कारण है कि माइग्रेन के इलाज में केवल दवाओं का सेवन ही नहीं, बल्कि जीवनशैली में सुधार करना भी उतना ही आवश्यक माना जाता है।
अजवाइन में सबसे महत्वपूर्ण तत्व थाइमोल है। शोध के अनुसार, थाइमोल में सूजन कम करने, बैक्टीरिया से लड़ने और दर्द की तीव्रता घटाने वाले गुण पाए जाते हैं। जब शरीर में सूजन बढ़ती है, तो वह कई बार माइग्रेन के दर्द को भी बढ़ा सकती है। ऐसे में थाइमोल सूजन की प्रक्रिया को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। हालांकि यह माइग्रेन का इलाज नहीं है, लेकिन कुछ लोगों में दर्द की तीव्रता कम करने में सहायक हो सकता है।
आयुर्वेद में भी अजवाइन को पाचन सुधारने वाला और वात-कफ को संतुलित करने वाला बताया गया है। पाचन तंत्र और दिमाग के बीच एक गहरा संबंध होता है। इसे गट-ब्रेन कनेक्शन कहा जाता है। कई लोगों में गैस, अपच और पेट फूलने जैसी समस्याएं माइग्रेन को बढ़ा सकती हैं। अजवाइन पाचन को बेहतर बनाने और गैस कम करने में मदद करती है। जब पाचन तंत्र सामान्य रहता है, तो माइग्रेन के कुछ ट्रिगर भी कम हो सकते हैं।
अजवाइन में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट भी शरीर के लिए फायदेमंद माने जाते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस कोशिकाओं को प्रभावित कर सकते हैं। एंटीऑक्सीडेंट इन हानिकारक तत्वों के असर को कम करने में मदद करते हैं। इसी कारण माना जाता है कि अजवाइन शरीर में होने वाले तनाव और सूजन को कुछ हद तक नियंत्रित करने में सहायक हो सकती है।
माइग्रेन के दौरान कई लोग अजवाइन की गर्म पोटली का इस्तेमाल करते हैं। इसके लिए हल्की गर्म की गई अजवाइन को सूती कपड़े में बांधकर उसकी भाप या खुशबू ली जाती है। माना जाता है कि इसकी तेज सुगंध नाक के रास्ते श्वसन तंत्र को आराम देती है और कई लोगों में सिर के भारीपन की भावना कम हो सकती है। हालांकि इस तरीके को इलाज का विकल्प नहीं मानना चाहिए।
कुछ लोग अजवाइन का पानी भी पीते हैं। अजवाइन को पानी में उबालकर तैयार किया गया पेय पाचन को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। यदि किसी व्यक्ति में माइग्रेन का संबंध गैस, अपच या पेट की गड़बड़ी से है, तो यह तरीका कुछ राहत दे सकता है। हालांकि यह जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति में समान असर करेगा। सभी में माइग्रेन के कारण अलग-अलग हो सकते हैं।
Source: IANS

