एक्सप्लेनर: नए यूपीए फ्रेमवर्क में पी2पी लेनदेन पर नहीं लगेगा चार्ज, ग्राहकों को जारी रहेगी छूट
नए यूपीआई फ्रेमवर्क से किसी भी पर्सन-टू-पर्सन (पी2पी) लेनदेन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि इस तरह के लेनदेन को एमडीआर ढांचे से बाहर रखा गया है।

नई दिल्ली, 15 सितंबर । नए यूपीआई फ्रेमवर्क से किसी भी पर्सन-टू-पर्सन (पी2पी) लेनदेन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि इस तरह के लेनदेन को एमडीआर ढांचे से बाहर रखा गया है। यह जानकारी मंगलवार को वित्त मंत्रालय द्वारा जारी एक्सप्लेनर में दी गई।
एक्सप्लेनर में बताया गया कि नए यूपीआई ढांचे के तहत 2,000 रुपए तक के व्यापारियों को किए जाने वाले भुगतान के साथ-साथ छोटे व्यापारियों के लिए जीरो-एमडीआर फ्रेमवर्क के तहत आने वाले लेनदेन भी मुफ्त रहेंगे। इसके परिणामस्वरूप, सभी पर्सन-टू-मर्टेंच (पी2एम) लेनदेन में लगभग 96 प्रतिशत लेनदेन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
एमडीआर केवल 2,000 रुपए से अधिक के पीएएम लेनदेन पर लागू होगा। यह व्यापारिक शुल्क पर लगेगा।
वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि एमडीआर न तो कोई टैक्स है और न ही सरकार या नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) द्वारा वसूला जाने वाला शुल्क है। इसे यूपीआई इकोसिस्टम के संचालन और निरंतर विस्तार में सहायता के लिए बैंकों और पेमेंट एप्लिकेशन प्रदाताओं सहित भुगतान इकोसिस्टम के प्रतिभागियों के बीच वितरित किया जाएगा।
0.4 प्रतिशत का मामूली एमडीआर केवल 2,000 रुपए से अधिक के पी2एम लेनदेन पर लागू होगा। एमडीआर को बैंकों, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स और यूपीआई एप्लिकेशन प्रोवाइडर्स सहित भुगतान इकोसिस्टम के प्रतिभागियों के बीच साझा किया जाएगा। 75,000 रुपए और उससे अधिक के लेनदेन के लिए एमडीआर प्रति लेनदेन अधिकतम 300 रुपए होगा।
रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट सहित आवश्यक और कम मार्जिन वाले क्षेत्रों में 2,000 रुपए से अधिक के लेनदेन पर प्रति लेनदेन 5 रुपए का फ्लैट एमडीआर लगेगा। यह फ्लैट शुल्क महत्वपूर्ण सार्वजनिक सेवाओं और कम मार्जिन पर काम करने वाले कारोबारों के लिए लागत की निश्चितता प्रदान करेगा।
म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज, स्टॉकब्रोकर और डीलरों से संबंधित भुगतानों पर 0.02 प्रतिशत का एमडीआर लगेगा, जो प्रति लेनदेन अधिकतम 300 रुपए होगा। कम दर का उद्देश्य औपचारिक वित्तीय बाजारों में खुदरा भागीदारी को जारी रखने में मदद करना है।
एमडीआर व्यापारी भुगतान इकोसिस्टम के भीतर लिया जाने वाला शुल्क है। यह यूपीआई भुगतान करने वाले ग्राहकों पर लगाया जाने वाला शुल्क नहीं है। बैंकों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है कि व्यापारी एमडीआर शुल्क ग्राहकों से न वसूलें। यूपीआई एप्लिकेशन प्रोवाइडर्स को प्लेटफॉर्म फीस या छिपे हुए शुल्क लगाने से स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित किया गया है।
वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि बैंकों और एनपीसीआई द्वारा निर्धारित दैनिक लेनदेन सीमाएं (आमतौर पर लेनदेन की श्रेणी के आधार पर 1 लाख रुपए से 5 लाख रुपए तक होती हैं) सुरक्षा और जोखिम प्रबंधन के उपाय हैं। ये शुल्क लगाने की सीमाएं नहीं हैं।
यह फ्रेमवर्क आम लोगों, सूक्ष्म उद्यमों और छोटे कारोबारों की सुरक्षा करता है, जबकि बड़े व्यापारी लेनदेन पर सीमित शुल्क लागू करता है।
छोटे व्यापारियों के बीच यूपीआई को अपनाने को बढ़ावा देने के लिए एक समर्पित फंड स्थापित किया जाएगा। कुल एमडीआर संग्रह के 5 प्रतिशत के बराबर राशि इस फंड में योगदान की जाएगी।
यह फंड यूपीआई की व्यापक स्वीकार्यता, निरंतर उपयोग और भारत के डिजिटल भुगतान इकोसिस्टम में छोटे कारोबारों के समावेशन में सहायता करेगा।
एक्सप्लेनर में कहा गया है कि बड़े व्यापारी लेनदेन से उत्पन्न राजस्व बैंकों, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स और यूपीआई एप्लिकेशन प्रोवाइडर्स को भुगतान बुनियादी ढांचे के विस्तार और सुधार में सहायता करेगा, जिसमें ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्र भी शामिल हैं।
Source: IANS

