हेल्थ एंड फिटनेस
खाने-पीने की आदतों का हमारी सेहत पर सीधा असर पड़ता है। अब एक नई रिसर्च में सामने आया है कि दही, प्रोबायोटिक्स और प्रीबायोटिक्स जैसे खाद्य पदार्थ आंतों की सेहत को बेहतर रखने में मदद कर सकते हैं और इनका सेवन कोलोरेक्टल कैंसर (आंत और मलाशय का कैंसर) के खतरे को कम कर सकता है।
आज के समय में मोबाइल, कंप्यूटर और टीवी का इस्तेमाल बहुत बढ़ गया है। लगातार स्क्रीन देखने की वजह से आंखों में थकान, जलन, सूखापन और रोशनी से जुड़ी समस्याएं बढ़ रही हैं।
महाराष्ट्र खाद्य और औषधि प्रशासन (एमएफडीए) ने तीन कॉस्मेटिक उत्पादों के इस्तेमाल के खिलाफ सार्वजनिक चेतावनी जारी की है। लैब टेस्ट में इनमें मरकरी और लेड की खतरनाक रूप से ज्यादा मात्रा पाई गई, जिससे गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों को लेकर चिंता पैदा हो गई है।
अल्जाइमर बीमारी को आमतौर पर लोग भूलने की समस्या के तौर पर जानते हैं। जब किसी को नाम याद न रहे, चीजें रखकर भूल जाए या जगहों को पहचानने में दिक्कत हो, तब अक्सर कहा जाता है कि यह अल्जाइमर का असर हो सकता है, लेकिन अब वैज्ञानिकों की एक नई रिसर्च ने में खुलासा हुआ है कि दिमाग में बदलाव सिर्फ याददाश्त कमजोर होने के बाद ही नहीं, बल्कि उससे कई साल पहले भी शुरू हो सकते हैं।
आजकल लोग अपने घरों और कार्यालयों को हरा-भरा और आकर्षक बनाने के लिए विभिन्न प्रकार के इनडोर पौधे लगाते हैं। इन्हीं में से एक है स्नेक प्लांट (संसेविएरिया), जो अपनी खूबसूरत लंबी पत्तियों के साथ-साथ स्वास्थ्य संबंधी कई लाभों के लिए भी जाना जाता है।
किडनी की बीमारी और डायलिसिस की स्थिति में खानपान का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। जब किडनी ठीक से काम नहीं करती, तो शरीर से कई ऐसे मिनरल्स बाहर नहीं निकल पाते जो सामान्य रूप से यूरिन के जरिए निकल जाते हैं।
हाई ब्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप) को लंबे समय से दिल की बीमारियों, स्ट्रोक और किडनी से जुड़ी समस्याओं का बड़ा कारण माना जाता रहा है। डॉक्टर हमेशा इस बात पर जोर देते हैं कि ब्लड प्रेशर को नियंत्रण में रखना जरूरी है, क्योंकि यह अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के बढ़ता रहता है।
वर्षा ऋतु का मौसम अपने साथ ठंडक और ताजगी लेकर आता है, लेकिन इसी समय शरीर के अंदर कई बदलाव भी होते हैं। आयुर्वेद के अनुसार, इस मौसम में पाचन शक्ति, यानी जठराग्नि, थोड़ी कमजोर हो जाती है, इसलिए जो भी हम खाते-पीते हैं उसका सीधा असर हमारे स्वास्थ्य पर पड़ता है।
5 से 12 साल की उम्र बच्चों के शरीर और दिमाग के विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण चरण माना जाता है। इसी समय बच्चे तेजी से बढ़ते हैं, उनकी हड्डियां मजबूत होती हैं, मांसपेशियां विकसित होती हैं, और दिमाग सीखने की क्षमता को तेजी से बढ़ाता है।
आज के समय में स्मार्टफोन हर उम्र के लोगों की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। खासकर बुजुर्गों के लिए यह तकनीक अपने परिवार और दुनिया से जुड़े रहने का एक आसान जरिया है, लेकिन हाल ही में एक नई स्टडी में यह बात सामने आई है कि अगर स्मार्टफोन का इस्तेमाल जरूरत से ज्यादा या आदत के तौर पर किया जाए तो यह मानसिक स्वास्थ्य पर उल्टा असर भी डाल सकता है।
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