कांग्रेस के पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की सजा बरकरार, दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के बाद दतिया उपचुनाव का रास्ता साफ

नई दिल्ली/भोपाल, 10 जुलाई । दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को कांग्रेस के पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने 1998 के दतिया कोऑपरेटिव रूरल डेवलपमेंट बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) धोखाधड़ी मामले में अपनी सजा को चुनौती दी थी। इस फैसले से मध्य प्रदेश में दतिया विधानसभा उपचुनाव के तय कार्यक्रम के अनुसार होने का रास्ता साफ हो गया है।

हाईकोर्ट के आदेश का मतलब है कि भारती की सजा और मध्य प्रदेश विधानसभा से उनकी अयोग्यता फिलहाल बनी रहेगी, जिससे उपचुनाव को लेकर बनी कानूनी अनिश्चितता खत्म हो गई है।

भारती को इस साल 1 अप्रैल को दिल्ली की एक विशेष अदालत ने आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी से संबंधित भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धाराओं के तहत दोषी ठहराया था। 2 अप्रैल को अदालत ने उन्हें तीन साल की जेल और जुर्माने की सजा सुनाई थी।

दोषी ठहराए जाने के बाद 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम' के तहत भारती को विधायक पद के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया था। इस कानून में प्रावधान है कि जिन विधायकों को दो साल या उससे अधिक की जेल की सजा होती है, उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया जाता है। इसके बाद दतिया विधानसभा सीट को खाली घोषित कर दिया गया था और चुनाव आयोग ने उपचुनाव की घोषणा की थी।

अभियोजन पक्ष के मुताबिक, यह मामला दतिया कोऑपरेटिव रूरल डेवलपमेंट बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट से जुड़ी अनियमितताओं से संबंधित है। आरोप था कि डिपॉजिट की अवधि बढ़ाने और ब्याज का दावा करने के लिए बैंक के रिकॉर्ड में हेरफेर की गई थी। उस समय राजेंद्र भारती बैंक के निदेशक मंडल के अध्यक्ष और संस्थान के ट्रस्टी थे।

सुनवाई के दौरान राजेंद्र भारती की ओर से पेश वरिष्ठ वकील पी. चिदंबरम ने तर्क दिया कि यह विवाद दीवानी प्रकृति का था, न कि कोई आपराधिक मामला। उन्होंने कहा कि बैंक ने पहले सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को दीवानी विवाद के तौर पर देखा था, जहां दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया था।

उन्होंने यह भी कहा कि समझौते की रकम अभी मिलनी बाकी है और फिक्स्ड डिपॉजिट बैंक के पास ही है। हालांकि हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश में दखल देने से इनकार कर दिया और याचिका खारिज कर दी।

यह फैसला राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे दतिया उपचुनाव के सामने मौजूद कानूनी बाधा दूर हो गई है। इस उपचुनाव में सत्ताधारी भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला होने की उम्मीद है। चुनाव आयोग के शेड्यूल के मुताबिक, नॉमिनेशन 13 जुलाई तक भरे जा सकते हैं, 15 जुलाई को स्क्रूटनी होगी और नाम वापस लेने की आखिरी तारीख 17 जुलाई है।

वहीं, वोटिंग 3 अगस्त को होगी, जबकि वोटों की गिनती 6 अगस्त को होगी।

भाजपा और कांग्रेस ने अभी तक उपचुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की है, हालांकि उम्मीद है कि दोनों पार्टियां नॉमिनेशन की समय-सीमा खत्म होने से पहले ऐसा कर लेंगी।

Source: IANS

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