मद्रास हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: 'जन नायगन' पायरेसी केस में दो आरोपियों की जमानत खारिज

चेन्नई, 3 जुलाई । साउथ सिनेमा के सुपरस्टार और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय की फिल्म 'जन नायगन' को लेकर चल रहा विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। अब इसके पायरेसी मामले में मद्रास हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए दो आरोपियों की जमानत याचिकाओं को खारिज कर दिया है।

सुनवाई के दौरान चेन्नई साइबर क्राइम पुलिस ने कोर्ट को बताया कि फिल्म 'जन नायगन' का पायरेटेड वर्जन अब तक करीब 1.2 करोड़ यानी 12 मिलियन लोगों द्वारा देखा जा चुका है। बता दें कि यह फिल्म अभी तक आधिकारिक रूप से सिनेमाघरों में रिलीज भी नहीं हुई है और इसे सेंसर बोर्ड से अंतिम मंजूरी भी नहीं मिली है।

यह मामला तब शुरू हुआ जब केवीएन प्रोडक्शंस ने फिल्म के ऑनलाइन लीक होने की शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के बाद चेन्नई साइबर क्राइम पुलिस ने तुरंत जांच शुरू की और इस पूरे पायरेसी नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 21 लोगों पर मामला दर्ज किया। जांच के दौरान कई आरोपियों को गिरफ्तार भी किया गया, जबकि दो आरोपी अब भी फरार बताए जा रहे हैं।

इन्हीं गिरफ्तार आरोपियों में रजनी और जयप्रकाश ने मद्रास हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी। जब यह मामला न्यायमूर्ति सी. कुमारप्पन के समक्ष सुनवाई के लिए आया, तो पुलिस ने अदालत के सामने पूरे मामले की गंभीरता को विस्तार से रखा।

पुलिस ने अदालत को बताया कि इस नेटवर्क के पीछे काम करने वालों ने पहले फिल्म की डिजिटल फाइलें हासिल कीं और फिर उन्हें अलग-अलग माध्यमों से जोड़कर एक पूरा पायरेटेड वर्जन तैयार किया। इसके बाद इसे इंटरनेट पर अपलोड किया गया, जहां से यह तेजी से पायरेसी वेबसाइट्स और प्लेटफॉर्म्स तक पहुंच गया। यह पूरा ऑपरेशन इतनी तेजी से हुआ कि फिल्म के रिलीज से पहले ही करोड़ों लोग इसे देख चुके थे।

सरकारी पक्ष ने यह भी दलील दी कि इस मामले में अभी जांच पूरी नहीं हुई है और कई अहम सबूतों की जांच बाकी है। इसी आधार पर पुलिस ने आरोपियों को जमानत देने का विरोध किया। अदालत ने पुलिस की इन दलीलों को गंभीरता से लेते हुए दोनों आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं।

यह पूरा मामला 9 अप्रैल 2026 की रात से शुरू हुआ था, जब 'जननायगन' के कुछ क्लिप्स और बाद में पूरी फिल्म इंटरनेट पर लीक हो गई थी। इसके बाद प्रोडक्शन हाउस ने तुरंत हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और अवैध स्ट्रीमिंग रोकने के लिए आदेश हासिल किया। कोर्ट ने इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स को भी निर्देश दिए थे कि वे ऐसी वेबसाइट्स और लिंक को ब्लॉक करें, जहां फिल्म अवैध रूप से उपलब्ध थी।

Source: IANS

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