धुरंधर-2 की फाइनल मिक्सिंग में लगे 30 घंटे, बिना नींद लिए पूरी मेहनत के साथ काम किया गया पूरा

मुंबई, 11 अप्रैल। फिल्म धुरंधर: द रिवेज रिलीज के साथ ही छाई हुई है और फिल्म का कलेक्शन बॉक्स ऑफिस पर तेजी से बढ़ रहा है। 

फिल्म 1600 करोड़ का शानदार कलेक्शन कर चुकी है, लेकिन इसी के साथ आदित्य धर फिल्म के पीछे असली 'धुरंधर' से फैंस मिलवा रहे हैं और हर किसी के शानदार काम की सराहना भी कर रहे हैं। अब उन्होंने ऐसे दो शख्स के बारे में बताया, जिन्होंने फिल्म के हर सीन को सुखद बनाते हुए बैकग्राउंड संगीत का ध्यान रखा।

आदित्य धर ने भारतीय फिल्म साउंड डिजाइनर, साउंड एडिटर और ऑडियो मिक्सर बिश्वदीप चटर्जी और साउंड मैन जस्टिन जोस की खुलकर तारीफ की है। उनका कहना है कि अगर ये दोनों नहीं होते तो वे फिल्म की कल्पना नहीं कर पाते। बिश्वदीप चटर्जी और जस्टिन जोस आदित्य के साथ फिल्म 'उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक' के समय से काम कर रहे हैं और उन्होंने हमेशा दोनों को अपना बड़ा भाई माना है। निर्देशक ने खुलासा किया कि फिल्म 'उरी' के समय फाइनल मिक्सिंग में 9 दिन का लंबा समय लगा था, जबकि धुरंधर और धुरंधर-2 की फाइनल मिक्सिंग में 24 घंटे और 30 घंटे का समय लगा।

उन्होंने सेट के पीछे की फोटोज को शेयर करते हुए लिखा, "धुरंधर और धुरंधर: द रिवेंज के संगीत के पीछे की जान, बिश्वादिप (बिशु दा) और जस्टिन सर को सलाम। मैं बिशु दा को अपने असिस्टेंट के दिनों से जानता हूं, जब मैं एक जिज्ञासु बच्चा था और ध्वनि की हर छोटी-छोटी बात के बारे में लगातार सवाल पूछता रहता था। उन्होंने कभी धैर्य नहीं खोया। वह मेरे साथ बैठते और हर बारीकी, हर परत, हर चुनाव को समझाते। कई मायनों में, यहीं से ध्वनि और सिनेमा के बारे में मेरी समझ की सही मायने में शुरुआत हुई।"

उन्होंने आगे लिखा, "उरी से लेकर धुरंधर तक, वे मेरे लिए हमेशा सहारा रहे हैं। सिर्फ़ सहयोगी ही नहीं, बल्कि निरंतर मार्गदर्शक, हमेशा मुस्कुराते हुए, हमेशा सिखाते हुए, हमेशा मुझे छोटे भाई की तरह मानते हुए। पार्ट 1 की शूटिंग का हमारा आखिरी दिन 2 नवंबर 2025 था। फिल्म 5 दिसंबर 2025 को रिलीज हुई। इतने कम समय में, एडिटिंग, बैकग्राउंड म्यूजिक और गानों की फाइनल सेटिंग के बाद, पूरी फिल्म के फाइनल डायरेक्टर मिक्स को तैयार होने में सिर्फ 24 घंटे लगे और दूसरे पार्ट की फाइनल मिक्सिंग में सिर्फ 30 घंटे लगे। इतनी बड़ी फिल्म के लिए यह नामुमकिन सा लगता है।"

निर्देशक का कहना है कि उनके काम में कभी भी दबाव नहीं देखा, भले ही समय कितना भी कम क्यों न रहा हो। उन्होंने हमेशा सिर्फ सिखाने की कोशिश की और हमेशा आदित्य धर ने बच्चे की तरह नए संगीत की बारीकियों को सीखा।

Source: IANS
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