काशी में मांस-मछली की बिक्री पर रोक के फैसले का संतों ने किया स्वागत, अयोध्या में भी उठी मांग
वाराणसी नगर निगम द्वारा काशी विश्वनाथ मंदिर के 2 किलोमीटर के दायरे में मांस-मछली की बिक्री पर रोक लगाने के फैसले पर संतों ने प्रतिक्रिया दी और अयोध्या में भी इसी तरह की पाबंदियां लगाने की मांग की।।

अयोध्या, 7 जून । वाराणसी नगर निगम द्वारा काशी विश्वनाथ मंदिर के 2 किलोमीटर के दायरे में मांस-मछली की बिक्री पर रोक लगाने के फैसले पर संतों ने प्रतिक्रिया दी और अयोध्या में भी इसी तरह की पाबंदियां लगाने की मांग की।
सीताराम दास महाराज ने कहा, "वाराणसी नगर निगम द्वारा लिया गया यह फैसला अत्यंत सराहनीय है। मैं दिल से उनका आभार व्यक्त करता हूं कि उन्होंने काशी विश्वनाथ की पावनता, पौराणिकता, शुद्धता और सुचिता को बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया है। यह वास्तव में प्रशंसनीय निर्णय है। इसके लिए संपूर्ण हिंदू समाज उनकी सराहना कर रहा है, और साधु-संत भी इस फैसले के समर्थन में खड़े हैं।"
उन्होंने कहा, "पूरे भारतवर्ष में जितने भी तीर्थ और पवित्र स्थल हैं, उनकी सुचिता और पवित्रता हमारे सनातन धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी गई है। किसी भी धार्मिक कार्य की पूर्णता के लिए उससे जुड़ी पवित्रता और शुद्धता आवश्यक होती है। काशी की पावनता, शुद्धता और सुचिता को बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया यह निर्णय बहुत अच्छा है। इसके लिए मैं एक बार फिर आभार और साधुवाद व्यक्त करता हूं।"
आचार्य संदीप तिवारी ने कहा, "काशी विश्वनाथ क्षेत्र में नगर निगम द्वारा लिया गया यह फैसला स्वागत योग्य है। जो भी व्यक्ति वाराणसी और काशी विश्वनाथ का इतिहास जानता है, वह समझता है कि यह नगरी केवल बाबा विश्वनाथ तक सीमित नहीं है। यह भगवान बुद्ध से भी जुड़ी हुई है, जिन्होंने दया, सत्य और अहिंसा का संदेश दिया था, इसलिए यह एक धार्मिक और ऐतिहासिक नगरी है। यह निर्णय अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक है। वर्तमान में राष्ट्रवादी सरकार ऐसे कार्यों को बढ़ावा देना चाहती है जो समाज में संवेदनशीलता और जीवों के प्रति करुणा का भाव पैदा करें। इस प्रकार के फैसले समाज को जीवों और मानवता के प्रति नई सोच प्रदान करते हैं, इसलिए यह निर्णय पूरी तरह उचित और स्वागत योग्य है।"
आर्य संत वरुण दास महाराज ने कहा, "काशी जैसी पवित्र भूमि के बारे में संत समाज में कहा जाता है—'चना चबेना गंगाजल, जो पुरवै करतार; काशी कबहूं न छोड़िए, विश्वनाथ दरबार।' ऐसी बाबा विश्वनाथ की भूमि पर मांसाहार की बिक्री और सेवन का जो प्रचलन था, उस पर यदि नगर निगम ने तत्काल प्रभाव से रोक लगाई है तो यह स्वागत योग्य कदम है।"
उन्होंने कहा, "काशी पंचकोशी क्षेत्र के भीतर इस प्रकार की गतिविधियां पहले से ही नहीं होनी चाहिए थीं। हम लोग लंबे समय से यह मांग उठाते रहे हैं। लहरतारा में पूज्य महाराज की कथा के दौरान भी हमने यह विषय उठाया था। यह समाचार सुनकर अत्यंत प्रसन्नता हुई है। मैं सरकार और नगर निगम के उन सभी अधिकारियों को धन्यवाद और साधुवाद देता हूं जिन्होंने यह प्रस्ताव पारित किया।"
महंत डॉ. देवेशाचार्य महाराज ने कहा, "काशी विश्वनाथ मंदिर के आसपास के क्षेत्रों में प्रतिबंध लगाया जाना निश्चित रूप से प्रशंसनीय कदम है, लेकिन मैं वहां के सांसद और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा नगर निगम से आग्रह करूंगा कि केवल दो किलोमीटर की सीमा पर्याप्त नहीं है। बनारस की पवित्रता को देखते हुए संकटमोचन, दुर्गाकुंड, काल भैरव और अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों को भी इस दायरे में शामिल किया जाना चाहिए। पूरे वाराणसी नगर निगम क्षेत्र में मांस और मदिरा की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। जब श्रद्धालु और पर्यटक वहां आते हैं तो वे केवल मंदिर के आसपास ही नहीं, बल्कि दूर-दराज के क्षेत्रों में भी ठहरते हैं। ऐसे में यदि उन्हें आसपास अपवित्र वातावरण मिले तो उनकी धार्मिक भावना प्रभावित होती है।"
उन्होंने कहा, "मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संबंधित प्रशासन से मांग करता हूं कि पूरे वाराणसी नगर निगम क्षेत्र को इस प्रतिबंध के दायरे में लाया जाए। साथ ही, मैं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री से पुनः आग्रह करता हूं कि अयोध्या में भी मांस और शराब की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए।"
Source: IANS

