भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन के लोको पायलट ने चेन्नई में ली खास ट्रेनिंग, सेफ्टी रेटिंग की तारीफ की
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को हरियाणा के जींद से देश की पहली हाइड्रोजन से चलने वाली पैसेंजर ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस ऐतिहासिक मौके पर ट्रेन के लोको पायलट चंद्रकांत कुमार ने इसकी खासियत, सुरक्षा व्यवस्था और अपनी विशेष ट्रेनिंग के बारे में जानकारी दी।

जींद, 17 जुलाई । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को हरियाणा के जींद से देश की पहली हाइड्रोजन से चलने वाली पैसेंजर ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस ऐतिहासिक मौके पर ट्रेन के लोको पायलट चंद्रकांत कुमार ने इसकी खासियत, सुरक्षा व्यवस्था और अपनी विशेष ट्रेनिंग के बारे में जानकारी दी।
चंद्रकांत कुमार ने आईएएनएस से कहा, "यह ट्रेन बेहद शानदार है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह हाइड्रोजन से चलती है और बिल्कुल भी प्रदूषण नहीं फैलाती। इसमें कार्बन उत्सर्जन नहीं होता। यही बात इसे डीजल और बिजली से चलने वाली अन्य ट्रेनों से अलग बनाती है। यह ट्रेन हाइड्रोजन पर चलेगी। हाइड्रोजन पानी से अलग की जाती है और उसी से यह ट्रेन संचालित होगी।"
उन्होंने कहा, "हम सभी को चेन्नई में चार दिन की ट्रेनिंग दी गई, जिसके बाद इस ट्रेन का संचालन करने की जिम्मेदारी सौंपी गई।"
ट्रेन की सुरक्षा व्यवस्था पर बोलते हुए लोको पायलट ने कहा, "इसकी सुरक्षा रेटिंग बहुत उच्च स्तर की है। धुआं, गैस रिसाव या आग जैसी किसी भी स्थिति में यह अलग तरीके से काम करती है। लोको पायलट के लिए ट्रेन चलाने की पूरी व्यवस्था बेहद आरामदायक है। इस ट्रेन में सभी सुरक्षा सिस्टम ऑटोमैटिक हैं।"
उन्होंने ट्रेन की गति के बारे में भी जानकारी दी। चंद्रकांत कुमार ने कहा, "इस ट्रेन की अधिकतम गति 110 किलोमीटर प्रति घंटा है, लेकिन जींद-सोनीपत रेलखंड पर निर्धारित गति सीमा 75 किलोमीटर प्रति घंटा होने के कारण यह ट्रेन फिलहाल 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगी।"
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जींद से इस हाइड्रोजन ट्रेन का शुभारंभ किया। यह ट्रेन जींद-सोनीपत रेलखंड पर नियमित रूप से संचालित होगी। इस परियोजना के तहत जींद में स्वदेशी हाइड्रोजन भंडारण और रीफ्यूलिंग सुविधा भी विकसित की गई है। साथ ही पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन ने संपीड़ित हाइड्रोजन गैस के भंडारण और वितरण के लिए आवश्यक लाइसेंस भी जारी कर दिया है।
इस ट्रेन के संचालन के साथ भारत जर्मनी, जापान, चीन और अमेरिका जैसे उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो गया है, जो स्वच्छ रेल परिवहन के लिए हाइड्रोजन तकनीक पर काम कर रहे हैं। भारतीय रेलवे की यह पहल नवाचार, ऊर्जा दक्षता, पर्यावरण संरक्षण और नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन के राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
Source: IANS

