2021 में टीएमसी के पक्ष में रहे 152 सीटों के नतीजे, क्या रिकॉर्ड मतदान और बंगाल का पुराना ट्रेंड इस बार कर देगा 'खेला'

कोलकाता, 24 अप्रैल । पश्चिम बंगाल में रिकॉर्ड तोड़ मतदान के बाद सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी पार्टी भाजपा अपनी-अपनी जीत के दावे कर रही हैं। जिन 152 सीटों पर पहले चरण में मतदान संपन्न हुआ है, उन पर 2021 में दोनों दलों के बीच हर-जीत का अंतर बहुत अधिक था। हालांकि, पश्चिम बंगाल का पुराना ट्रेंड और पहले चरण में रिकॉर्डतोड़ मतदान राज्य में एक बड़े बदलाव का भी संकेत दे रहा है।

पश्चिम बंगाल में पहले चरण में जिन 16 जिलों की 152 सीटों के लिए मतदान हुआ, उन जिलों में उत्तरी बंगाल के कूचबिहार, दार्जिलिंग, कलिम्पोंग, जलपाईगुड़ी, अलीपुरद्वार, उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण दिनाजपुर और मालदा जबकि दक्षिणी बंगाल के मुर्शिदाबाद, पूर्व मेदिनीपुर, पश्चिम मेदिनीपुर, झाड़ग्राम, पुरुलिया, बांकुड़ा, पश्चिम बर्धवान और बीरभूम शामिल हैं।

2021 के आंकड़े बताते हैं कि 152 सीटों में से भाजपा सिर्फ 59 सीटों पर जीत हासिल कर पाई थी, जबकि 92 सीटें तृणमूल कांग्रेस के खाते में थीं। जिलावार आंकड़े देखें तो अलीपुरद्वार के अंतर्गत आने वाली 5 विधानसभा सीटों पर टीएमसी का खाता नहीं खुला था। सभी सीटें भाजपा के खाते में गईं। उत्तर दिनाजपुर की 9 विधानसभा सीटों में से भाजपा को दो और टीएमसी को 7 सीटें मिलीं। कोलिम्पोंग सीट पर एक निर्दलीय उम्मीदवार को विजय मिली।

कूचबिहार में 9 में से भाजपा को 7 और टीएमसी को दो सीटें हासिल हुईं। जलपाईगुड़ी की 7 सीटों में से भाजपा 4 और टीएमसी 3 जीत पाई। झारग्राम की सभी 4 सीटों पर भाजपा शून्य पर सिमटी जबकि दक्षिण दिनाजपुर की 6 सीटों में से टीएमसी और भाजपा ने तीन-तीन सीटें हासिल कीं।

पिछली बार दार्जिलिंग की सभी सीटों पर भाजपा का झंडा लहराया, तो पश्चिम बर्धमान की 9 सीटों में से भाजपा को 3 और टीएमसी को 6 सीटों पर जीत मिली। पुरुलिया की 9 विधानसभा सीटों में से भाजपा 6 और टीएमसी 3 जीत सकी। पश्चिम मेदिनीपुर की 15 सीटों में से भाजपा सिर्फ दो हासिल कर सकी जबकि 13 टीएमसी के खाते में गईं। वहीं, पूर्वी मेदिनीपुर की 16 सीटों में से भाजपा 7 और टीएमसी 9 पर जीत पाई।

बांकुरा की 12 सीटों में से 8 पर भाजपा और 4 पर टीएमसी विजयी रही। बीरभूम की 11 सीटों में से भाजपा सिर्फ एक जीत पाई और 10 पर टीएमसी का दबदबा रहा। इसी तरह, मुर्शिदाबाद की 22 सीटों में से भाजपा सिर्फ दो जीत पाई और 20 सीटें टीएमसी के खाते में गईं। वहीं, मालदा की 12 सीटों में से भाजपा को 4 और टीएमसी को 8 पर जीत मिली।

हालांकि, 2021 के मुकाबले इस बार के वोट प्रतिशत को पश्चिम बंगाल में बदलाव के तौर पर माना जा रहा है। गुरुवार को पहले चरण में 16 जिलों की 152 सीटों पर 92.88 प्रतिशत वोटिंग हुई, जो पश्चिम बंगाल के इतिहास में सबसे अधिक है। एसआईआर में 91 लाख के करीब नाम कटे और वोटिंग के दिन कई जगह हिंसा के बावजूद पश्चिम बंगाल की जनता ने मतदान प्रतिशत का एक नया रिकॉर्ड स्थापित किया। 2021 के विधानसभा चुनावों में कुल 81.56 प्रतिशत वोटिंग हुई थी।

अक्सर ज्यादा वोटिंग का मतलब एंटी एनकंबैसी फैक्टर यानि सत्ता में मौजूदा पार्टी के खिलाफ जनता की नाराजगी के तौर पर माना जाता है। खास बात यह है कि 2011 में भी जब पश्चिम बंगाल में रिकॉर्ड 84.33 प्रतिशत वोटिंग हुई थी, तब राज्य में सत्ता परिवर्तन भी देखने को मिला था। उस समय 34 साल पुरानी लेफ्ट फ्रंट सरकार सत्ता से बाहर हो गई और ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस पहली बार सत्ता में आने का अवसर मिला था।

Source: IANS

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