एनसीईआरटी सिलेबस पर सियासी घमासान, कांग्रेस बोली- एकतरफा इतिहास नहीं पढ़ाया जाना चाहिए

नई दिल्ली, 26 जून । राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) द्वारा कक्षा 9 की पाठ्यपुस्तक में आपातकाल (इमरजेंसी) पर अध्याय शामिल किए जाने को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं के बीच तीखी बयानबाजी का दौर जारी है। एक तरफ सत्ता पक्ष इसे छात्रों को सच्चाई से अवगत कराने की पहल बता रहा है, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे गलत ठहराने में जुटा हुआ है।

कांग्रेस सांसद मनोज कुमार ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि नई पीढ़ी को इमरजेंसी के बारे में पढ़ाया जा रहा है, तो अन्य घटनाओं को भी पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि केवल एक पक्षीय इतिहास नहीं पढ़ाया जाना चाहिए, बल्कि हाल के वर्षों में हुई घटनाओं पर भी चर्चा होनी चाहिए।

उन्होंने भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए कहा, "आप अब युवा पीढ़ी को इमरजेंसी के बारे में बताने की कोशिश कर रहे हैं। मैं यह पूछना चाहता हूं कि एक और बात भी जोड़ी जानी चाहिए कि बिहार में चुनाव कैसे हुए और आपने चुनाव में कैसे धांधली की। चुनाव के दौरान आपने सरकारी खजाने से लोगों के बैंक खातों में 10,000-10,000 रुपये ट्रांसफर किए और चुनाव को प्रभावित किया। उस बात को भी जोड़ें, ताकि आने वाली पीढ़ी इसके बारे में पढ़े। यह भी शामिल करें कि आपने मध्य प्रदेश में हमारे उम्मीदवार को कोई समय नहीं दिया, जबकि झारखंड में आपने बार-बार समय दिया। यह भी जोड़ें कि पहले आप वोट चुराते थे और अब आपने सीटें चुराना शुरू कर दिया है।"

वहीं कांग्रेस नेता हुसैन दलवई के बयान पर पार्टी प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इंसान जन्म से ही एक सामाजिक और धार्मिक प्रवृत्ति के साथ होता है, लेकिन शिक्षा का उद्देश्य वैज्ञानिक सोच विकसित करना होना चाहिए। सुरेंद्र राजपूत ने आरोप लगाया कि वर्तमान शैक्षणिक ढांचे में बच्चों को एक विशेष वैचारिक दिशा में ढालने का प्रयास किया जा रहा है, जो उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य बच्चों को तार्किक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण देना होना चाहिए, ताकि वे वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ सकें।

दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने एनसीईआरटी द्वारा चुनाव आयोग (ईसीआई) पर शामिल किए गए अध्याय का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह सराहनीय कदम है क्योंकि इससे छात्रों को देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को समझने में मदद मिलेगी। खंडेलवाल ने कहा कि अब तक कई ऐसी बातें पढ़ाई जाती थीं जो देश के हित में नहीं थीं, इसलिए पाठ्यक्रम में सुधार आवश्यक था। उन्होंने कहा कि छात्रों को यह जानना चाहिए कि देश में चुनाव कैसे होते हैं और चुनाव आयोग किस प्रकार लोकतंत्र को मजबूत करने में भूमिका निभाता है।

भाजपा प्रवक्ता आर.पी. सिंह ने भी इस कदम का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि कक्षा 9 की पुस्तक में चुनाव आयोग पर शामिल अध्याय छात्रों के लिए बेहद उपयोगी है। उन्होंने कहा कि इससे विद्यार्थियों को मतदान प्रक्रिया और लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका को समझने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि जब छात्र 18 वर्ष के होकर मतदान के योग्य बनेंगे, तब उनके पास चुनावी प्रक्रिया की बेहतर समझ होगी, जिससे वे एक जिम्मेदार मतदाता बन सकेंगे।

इसी दौरान लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की विदेश यात्राओं को लेकर भी राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब राहुल गांधी बिना पूर्व सूचना के विदेश चले गए हों। उन्होंने दावा किया कि उनकी यात्राओं को लेकर अक्सर स्पष्टता नहीं होती और वे अचानक सार्वजनिक जीवन से अनुपस्थित हो जाते हैं।

Source: IANS

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