लेबनान में इजरायल की मौजूदगी पर फ्रांस ने उठाए सवाल, कहा- 'जो हो रहा वो ठीक नहीं'
फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बारो ने कहा है कि लेबनान के भीतर इजरायली सैनिकों की लंबे समय तक मौजूदगी को किसी भी आधार पर उचित नहीं ठहराया जा सकता।

पेरिस, 2 जून । फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बारो ने कहा है कि लेबनान के भीतर इजरायली सैनिकों की लंबे समय तक मौजूदगी को किसी भी आधार पर उचित नहीं ठहराया जा सकता।
यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका ने इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच संघर्षविराम पर सहमति की घोषणा की है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है।
मंगलवार को फ्रांस टीवी से बातचीत में बारो ने कहा कि लेबनानी क्षेत्र में इजरायल की सैन्य कार्रवाई और उसकी निरंतर मौजूदगी का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने कहा, "कुछ भी ऐसा नहीं है जो सैन्य अभियानों की निरंतरता और लेबनान के भीतर इजरायल के लंबे समय तक बने रहने को सही ठहरा सके।"
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ट्रुथ सोशल पर घोषणा की थी कि इजरायल और हिज्बुल्लाह लड़ाई रोकने पर सहमत हो गए हैं। इसके बावजूद दोनों पक्षों के बीच रातभर एक दूसरे पर हमले जारी रखने की खबरें सामने आईं, जिससे संघर्षविराम की स्थिति पर अनिश्चितता बनी हुई है।
लेबनान-इजरायल सीमा क्षेत्र पिछले कई महीनों से तनाव का केंद्र रहा है। गाजा युद्ध के बाद दोनों पक्षों के बीच सीमा पार हमले और जवाबी कार्रवाई तेज हुई है, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं।
फ्रांस लगातार कूटनीतिक समाधान और संघर्षविराम के पालन की वकालत करता रहा है। पेरिस का मानना है कि क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए सैन्य कार्रवाई के बजाय राजनीतिक संवाद और अंतरराष्ट्रीय समझौतों का सम्मान जरूरी है।
इस बीच, मंगलवार को संघर्ष विराम की खबरों के बीच ही इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान के प्रमुख शहर नबातियेह के निवासियों को तत्काल क्षेत्र खाली करने की चेतावनी जारी की। आईडीएफ ने तर्क दिया कि हिज्बुल्लाह ने संघर्षविराम समझौते का कथित तौर पर उल्लंघन किया, जिसके बाद वह इलाके में सैन्य कार्रवाई करने को मजबूर है।
इजरायली सेना के प्रवक्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी संदेश में कहा कि नागरिक अपनी सुरक्षा के लिए तुरंत अपने घर छोड़ दें और जहरानी नदी के उत्तर की ओर चले जाएं।
नबातियेह दक्षिणी लेबनान का एक महत्वपूर्ण शहरी केंद्र है। इजरायल की इस चेतावनी से संकेत मिलता है कि क्षेत्र में सैन्य अभियान या हवाई हमले किए जा सकते हैं।
Source: IANS
