ईरान पर कार्रवाई कोई नया युद्ध नहीं: ट्रंप

वॉशिंगटन, 7 जून । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा है कि यह कोई नया युद्ध नहीं है, बल्कि अमेरिका और उसके सहयोगियों की सुरक्षा के लिए उठाया गया आवश्यक कदम था। उन्होंने यह भी खारिज किया कि इस कार्रवाई से उन्होंने नए युद्धों से दूर रहने के अपने पुराने चुनावी वादे को तोड़ा है।

एनबीसी न्यूज के कार्यक्रम 'मीट द प्रेस' को दिए एक विशेष साक्षात्कार में ट्रंप से पूछा गया कि क्या ईरान के खिलाफ कार्रवाई उनके 2015 से किए जा रहे उस वादे के विपरीत है, जिसमें उन्होंने अमेरिका को नए युद्धों में नहीं झोंकने की बात कही थी।

इस पर ट्रंप ने कहा, "नहीं, बिल्कुल नहीं। मुझे एक शक्तिशाली और खतरनाक देश को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना था, क्योंकि वे उसका इस्तेमाल करते। मैं अपने देश की सेवा कर रहा हूं। अमेरिका सबसे पहले है।"

ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्होंने कभी यह गारंटी नहीं दी थी कि अमेरिका किसी भी युद्ध में शामिल नहीं होगा। उन्होंने कहा, "मुझे अंतहीन युद्ध पसंद नहीं हैं, लेकिन यह कोई अंतहीन युद्ध नहीं है।"

राष्ट्रपति ने दावा किया कि उनके सामने एक ओर आर्थिक स्थिरता बनाए रखने और दूसरी ओर ईरान से बढ़ते परमाणु खतरे का सामना करने का विकल्प था। उन्होंने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना पूरी दुनिया, मध्य पूर्व और इजरायल के हित में था।

ट्रंप ने बताया कि उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति बाराक ओबामा के दौर में हुए ईरान परमाणु समझौते को समाप्त किया था और बाद में ईरानी परमाणु ठिकानों पर सैन्य कार्रवाई की अनुमति दी।

उन्होंने दावा किया, "मैंने समझौता खत्म किया और फिर बी-2 बमवर्षक विमानों को भेजा, जिन्होंने उस ठिकाने को पूरी तरह नष्ट कर दिया।"

ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप से ईरान की क्षमताओं को भारी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने दावा किया कि कुछ ही दिनों में ईरान की सैन्य और परमाणु क्षमता को गंभीर रूप से कमजोर कर दिया गया।

हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि यह संघर्ष लंबे समय तक चलने वाला सैन्य अभियान नहीं बनेगा। ट्रंप ने कहा, "यह कोई दलदल नहीं है। हमने एक बेहद खतरनाक देश की सैन्य क्षमता और परमाणु खतरे को खत्म कर दिया है।"

उन्होंने कहा कि अमेरिका अपने उद्देश्यों के काफी करीब पहुंच चुका है और जल्द ही या तो एक मजबूत समझौता होगा या फिर अन्य विकल्पों पर विचार किया जाएगा।

ट्रंप ने स्पष्ट किया कि कूटनीति अभी भी एक विकल्प है, लेकिन जरूरत पड़ने पर सैन्य कार्रवाई से भी पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच एक सार्थक समझौते की संभावना बनी हुई है, लेकिन ईरान को किसी भी स्थिति में परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

गौरतलब है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर विवाद पिछले दो दशकों से अमेरिकी विदेश नीति का एक प्रमुख मुद्दा रहा है। विभिन्न अमेरिकी प्रशासन प्रतिबंधों, कूटनीतिक प्रयासों और अंतरराष्ट्रीय निगरानी तंत्र के जरिए ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकने की कोशिश करते रहे हैं।

Source: IANS

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