'यूएन मिलिट्री जेंडर एडवोकेट अवॉर्ड' से सम्मानित हुईं मेजर अभिलाषा बराक, पीएम मोदी ने दी बधाई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को मेजर अभिलाषा बराक को 'संयुक्त राष्ट्र मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर अवॉर्ड' मिलने पर बधाई दी और उनकी 'उत्कृष्ट सेवा' की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि भारतीय युवाओं, खासकर उन लड़कियों के लिए प्रेरणा है जो समाज और देश की सेवा करना चाहती हैं।

नई दिल्ली, 7 जून । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को मेजर अभिलाषा बराक को 'संयुक्त राष्ट्र मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर अवॉर्ड' मिलने पर बधाई दी और उनकी 'उत्कृष्ट सेवा' की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि भारतीय युवाओं, खासकर उन लड़कियों के लिए प्रेरणा है जो समाज और देश की सेवा करना चाहती हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पोस्ट करते हुए पीएम मोदी ने लिखा, “मेजर अभिलाषा बराक को 'संयुक्त राष्ट्र मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर अवॉर्ड' मिलने पर बधाई। मेजर बराक लेबनान में संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल (यूएनआईएफआईएल) के तहत एंगेजमेंट टीम कमांडर और जेंडर फोकल प्वाइंट के रूप में सेवा दे रही हैं।”
उन्होंने कहा, “यह सम्मान उनकी बेहतरीन सेवा को दर्शाता है और साथ ही संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में भारत के लंबे योगदान को भी दिखाता है। उनकी यह उपलब्धि कई भारतीय युवाओं के लिए प्रेरणा है, खासकर उन बेटियों के लिए जो देश और मानवता की सेवा करना चाहती हैं।”
मेजर बराक भारत की पहली महिला कॉम्बैट हेलीकॉप्टर पायलट हैं, उन्हें 'संयुक्त राष्ट्र के 2005 मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उन्हें शांति मिशन में महिलाओं की भूमिका और उनके दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के लिए दिया गया।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने पुरस्कार देते हुए कहा कि मेजर बराक 'उन लोगों के लिए एक आदर्श हैं जिनकी आप सेवा करती हैं और जिनके साथ आप काम करती हैं।'
लेबनान में तैनात मेजर बराक ने कहा, “सपनों का कोई जेंडर नहीं होता, और न ही नेतृत्व, साहस या मानवता की सेवा करने की इच्छाशक्ति का कोई जेंडर होता है।” लेबनान अभी यूएन का सबसे खतरनाक शांति-स्थापना वाला इलाका है।
उन्होंने यह भी कहा कि यह पुरस्कार इस बात की याद दिलाता है कि स्थायी शांति तभी बन सकती है जब हर आवाज सुनी जाए और हर व्यक्ति को आगे बढ़ने का मौका मिले।
संयुक्त राष्ट्र के सहायक महासचिव लिसा बटेनहेम ने कहा कि मेजर बराक के नेतृत्व और नए तरीकों ने सैन्य अभियानों में महिलाओं, शांति और सुरक्षा से जुड़े काम को आगे बढ़ाया है।
मेजर बराक के काम के बारे में गुटेरेस ने कहा कि स्थानीय समुदायों के साथ भरोसा बनाकर उन्होंने शुरुआती अलार्मिंग नेटवर्क बनाने में मदद की, जिससे नागरिकों की सुरक्षा मजबूत हुई।
उन्होंने यह भी कहा कि एक फ्रंटलाइन कमांडर के रूप में उन्होंने हजारों महिलाओं और लड़कियों से जुड़कर उन्हें कौशल प्रशिक्षण, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े कार्यक्रमों का लाभ दिलाया, जिससे उनकी जिंदगी बदली है।
मेजर बराक भारत की तीसरी महिला अधिकारी हैं, जिन्हें यह मिलिट्री जेंडर एडवोकेट अवॉर्ड मिला है। उनसे पहले मेजर सुमन गवानी और मेजर राधिका सेन को यह सम्मान मिल चुका है।
वह यूएनआईएफआईएल में भारतीय बटालियन के साथ एंगेजमेंट टीम कमांडर और जेंडर फोकल प्वाइंट के रूप में तैनात हैं। यह मिशन इजरायल और लेबनान की सीमा पर तैनात है और वर्तमान में सबसे जोखिमभरा शांति मिशन माना जाता है।
अपने सैन्य करियर को याद करते हुए मेजर बराक ने कहा, “भारतीय सेना की पहली महिला कॉम्बैट हेलीकॉप्टर पायलट होने के नाते मैंने खुद अनुभव किया कि जब अवसर मिलता है तो महिलाएं कैसे हर बाधा को पार कर सकती हैं और बड़े मुकाम हासिल कर सकती हैं।”
Source: IANS

