पीएम मोदी का स्टेट डिनर: कैसे डेयरी, लहसुन-फ्री डिश बनी चुनौती? जिल बाइडेन ने क‍िताब में क‍िए रोचक खुलासे

वॉशिंगटन, 7 जून । अमेरिका की पूर्व फर्स्ट लेडी जिल बाइडेन ने अपनी किताब 'व्यू फ्रॉम द ईस्ट विंग: ए मेमॉयर' में बताया है कि जून 2023 में जब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए व्हाइट हाउस में स्टेट डिनर रखा गया था, तब आखिरी समय में खाने को लेकर काफी बदलाव करने पड़े थे।

बाइडेन लिखती हैं कि स्टेट डिनर की तैयारी करना बहुत जटिल काम होता है और कई महीनों की प्लानिंग के बावजूद अचानक नई चुनौतियां सामने आ जाती हैं।

उन्होंने बताया, “जून 2023 में भारत के स्टेट डिनर पर हमें लगा था कि शाकाहारी मेन्यू से काम चल जाएगा, लेकिन आखिरी समय में कई लोगों ने वीगन, डेयरी-फ्री और लहसुन-फ्री खाने की मांग कर दी।”

उन्होंने आगे लिखा, “किचन स्टाफ को लोगों की अलग-अलग जरूरतों के हिसाब से प्लेट्स में बदलाव करने में काफी मेहनत करनी पड़ी।”

भारत का यह डिनर उन कई बड़े आयोजनों में से एक था जो बाइडेन प्रशासन ने व्हाइट हाउस में किए थे। बाइडेन के अनुसार, हर छोटी-बड़ी चीज पर ध्यान देना पड़ता है, फूलों की सजावट से लेकर मेन्यू और बैठने की व्यवस्था तक।

उन्होंने लिखा, “फर्स्ट लेडी के तौर पर आपको बहुत सारे फैसले लेने होते हैं; हर रंग, हर फूल, हर कोर्स। सब कुछ मिनट-दर-मिनट तय होता है और हर फैसले पर मेहमानों और मीडिया की नजर रहती है।”

उन्होंने व्हाइट हाउस की सोशल सेक्रेटरी कार्लोस एलिजोंडो की भी तारीफ की, जिन्होंने सालभर में होने वाले सैकड़ों कार्यक्रमों को संभालने में मदद की।

बाइडेन ने लिखा कि व्हाइट हाउस में हर साल कई सौ कार्यक्रम होते हैं, छोटे सैन्य रिटायरमेंट पार्टियों से लेकर मेक-ए-विश बच्चों की मुलाकात तक और बड़े स्टेट डिनर तक, जहां सैकड़ों लोग फॉर्मल कपड़ों में शामिल होते हैं।

उन्होंने बताया कि इतने सारे मेहमानों से मिलना थका देने वाला होता था। इतने बड़े इवेंट्स में फोटो लाइन में 300 से ज्यादा लोग होते थे। इतने लोगों से हाथ मिलाने से मेरे कलाई में बहुत दर्द होने लगा। कई बार दर्द से राहत पाने के ल‍िए मुझे अपना हाथ बर्फ के पानी में रखना पड़ता था। यह तरीका हिलेरी क्लिंटन ने मुझे बताया था।

बाइडेन ने कहा कि उनके पति, राष्ट्रपति जो बाइडेन, अक्सर लोगों से लंबी-लंबी बातचीत करते थे, जिससे कार्यक्रम समय पर खत्म करवाना मुश्किल हो जाता था। हम कोशिश करते थे कि चीजें जल्दी आगे बढ़ें, लेकिन जो हमेशा हर किसी से घंटों बात करना चाहते थे।

उनके अनुसार, मेहमानों को संभालना भी कई बार कूटनीतिक नियमों से ज्यादा मुश्किल हो जाता था। कुछ लोग नाराज हो जाते हैं कि वे अपने पूरे परिवार को नहीं ला सकते। कुछ लोग आते ही अपने टेबल की ‘स्टार पावर’ से खुश नहीं होते और नाम-पट्टियां बदलने की कोशिश करने लगते हैं।

उन्‍होंने कहा, “ये पावर गेम्स मुझे हैरान करते हैं।”

किताब में यह भी बताया गया कि अलग-अलग देशों की संस्कृति को ध्यान में रखकर कपड़े चुनने में भी सावधानी रखी जाती थी।

उन्होंने लिखा, “हम डिजाइनरों के साथ मिलकर ऐसा पहनावा चुनते थे जो सांस्कृतिक रूप से सही हो, इसलिए भारत, चीन या जापान जैसे देशों के लिए सफेद रंग नहीं पहना जाता था, क्योंकि वहां सफेद रंग शोक का प्रतीक माना जाता है।”

स्टेट डिनर को अमेरिका में सबसे प्रतिष्ठित कूटनीतिक आयोजनों में से एक माना जाता है। इनका उद्देश्य विदेशी नेताओं का सम्मान करना और अमेरिका की संस्कृति, मेहमाननवाजी और कूटनीतिक प्राथमिकताओं को दिखाना होता है।

Source: IANS

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