ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर को लेकर कवायद तेज, विदेश मंत्री अराघची ने असीम मुनीर से की मुलाकात

इस्लामाबाद, 25 अप्रैल । ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची अपने छोटे से डेलिगेशन के साथ पाकिस्तान पहुंचे, जहां अराघची ने शनिवार को इस्लामाबाद में पाकिस्तानी आर्मी चीफ असीम मुनीर से मुलाकात की। पाकिस्तान के बाद अराघची ओमान और रूस के दौरे पर भी जाएंगे।

ईरानी न्यूज एजेंसी आईआरएनए ने कहा कि अराघची और ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने फील्ड मार्शल मुनीर के साथ बैठक की। मुनीर ने खुद को ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थ के तौर पर पेश किया है।

ईरान के विदेश मंत्री शुक्रवार की देर रात को इस्लामाबाद पहुंचने के बाद से कम से कम दो बार पाकिस्तान के नेतृत्व मिल चुके हैं। हालांकि, फिलहाल यह साफ नहीं है कि ईरानी डेलिगेशन इस्लामाबाद से किस समय रवाना होगा। इसके अलावा, अमेरिका की तरफ से डेलिगेशन भी इस्लामाबाद पहुंच रहा है। ईरान ने अमेरिका के साथ किसी भी तरह की सीधी बातचीत करने से मना कर दिया है।

यही कारण है कि ईरान ने अपना पक्ष पाकिस्तान के सामने रखा है। वहीं, अमेरिकी डेलिगेशन के इस्लामाबाद पहुंचने के बाद वह अपना पक्ष पाकिस्तानी नेतृत्व के सामने रखेगा।

एक तरफ ईरान और अमेरिका बातचीत के लिए पाकिस्तान में सीजफायर के मुद्दे का हल निकालने के लिए कूटनीतिक कोशिशें कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ दोनों देश जहाजों को सीज करने का काम कर रहे हैं।

अमेरिका ने कहा कि होर्मुज में ब्लॉकेड जारी रहेगा। ईरान भी जिद पर अड़ा हुआ है कि जब तक अमेरिकी सेना का ब्लॉकेड रहेगा, तब तक होर्मुज स्ट्रेट बंद रहेगा। इसकी वजह से काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

होर्मुज बंद होने की वजह से तेल से भरे टैंकर का ट्रांजिट नहीं हो पा रहा है। इसकी वजह से दुनिया के अन्य देशों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई देशों में आर्थिक परेशानी उभरकर सामने आ रही है।

अंतरराष्ट्रीय संगठन का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट ज्यादा दिनों तक बंद रहा तो इसका सीधा असर कुछ ही समय में वैश्विक अर्थव्यवस्था पर देखने को मिलेगा। यही कारण है कि दुनिया के अन्य देश भी अमेरिका और ईरान के बीच जल्द सुलह कराने और स्थायी सीजफायर का समर्थन कर रहे हैं।

ईरानी विदेश मंत्री पाकिस्तान के बाद ओमान और रूस के दौरे पर 28 फरवरी से शुरू हुए हमलों को लेकर अपना पक्ष रखेंगे। वह ओमान और रूस को बताएंगे कि इस हमले की वजह से ईरान को कितना भारी नुकसान हुआ है और किन-किन परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

Source: IANS

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