नागर विमानन क्षेत्र के लिए नए नियम लागू करेगा केंद्र, 2027 से प्रभावी होंगे 'भारतीय वायुयान नियम'
केंद्र सरकार ने देश के नागर विमानन क्षेत्र के लिए एक नया और व्यापक नियामकीय ढांचा अधिसूचित किया है।
नई दिल्ली, 2 नवंबर । केंद्र सरकार ने देश के नागर विमानन क्षेत्र के लिए एक नया और व्यापक नियामकीय ढांचा अधिसूचित किया है। नागर विमानन मंत्रालय के अनुसार, 'भारतीय वायुयान नियम, 2026' 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे और लगभग नौ दशकों से लागू विमान नियम, 1937 का स्थान लेंगे।
नए नियम विमानन क्षेत्र के लगभग सभी प्रमुख पहलुओं को कवर करते हैं, जिनमें विमान पंजीकरण, एयरवर्थनेस सर्टिफिकेशन, विमान निर्माण, रखरखाव, उड़ान संचालन, कर्मियों के लाइसेंस और हवाईअड्डा संचालन से जुड़े विस्तृत प्रावधान शामिल किए गए हैं। इसके साथ ही विमान मालिकों, ऑपरेटरों, एयरलाइंस और अन्य विमानन हितधारकों की जिम्मेदारियां भी स्पष्ट रूप से तय की गई हैं।
नए ढांचे के तहत विमानों के पंजीकरण और एयरवर्थनेस प्रमाणन से संबंधित नियमों को विस्तार से परिभाषित किया गया है। इसमें यह सुनिश्चित करने के मानदंड शामिल हैं कि कोई विमान संचालन के लिए सुरक्षित और उपयुक्त है या नहीं। नियम विमान डिजाइन, निर्माण मानकों, संशोधनों और मरम्मत से संबंधित स्वीकृतियों को भी कवर करते हैं।
सरकार ने विमानों के पूरे परिचालन जीवनकाल के दौरान नियमित निरीक्षण और रखरखाव को अनिवार्य बनाया है। एयरलाइंस और विमान संचालकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि विमान लगातार सुरक्षा मानकों का पालन करते रहें और उनकी एयरवर्थनेस बनी रहे।
नए नियमों में पायलटों, एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियरों और एयर ट्रैफिक कंट्रोलरों सहित विमानन क्षेत्र के विभिन्न पेशेवरों के लिए योग्यता और लाइसेंसिंग मानकों को भी विस्तार से निर्धारित किया गया है। इसमें प्रशिक्षण, परीक्षा, अनुभव और चिकित्सीय फिटनेस संबंधी आवश्यकताओं के अलावा लाइसेंस के नवीनीकरण, निलंबन और रद्द करने की शर्तें भी शामिल हैं।
एयरलाइन संचालन से जुड़े प्रावधानों में फ्लाइट प्लानिंग, परिचालन प्रक्रियाओं और सुरक्षा मानकों पर विशेष जोर दिया गया है। पायलटों और केबिन क्रू के लिए फ्लाइट ड्यूटी और विश्राम अवधि से जुड़े नियम भी शामिल किए गए हैं, ताकि थकान से जुड़े जोखिम कम हों और उड़ान सुरक्षा मजबूत हो सके।
यात्रियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बदलावों में टिकट मूल्य निर्धारण में पारदर्शिता शामिल है। अगले वर्ष से एयरलाइंस को टिकट की कुल कीमत के साथ उसका विस्तृत ब्योरा भी देना होगा, जिसमें बेस फेयर, कर, शुल्क, रद्दीकरण शुल्क और रिफंड नीति की जानकारी स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करनी होगी।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि एयरलाइन किराये अब भी नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) की निगरानी के दायरे में रहेंगे। इसके अलावा नए नियमों में हवाईअड्डों के लाइसेंस, बुनियादी ढांचे के मानकों और परिचालन आवश्यकताओं से जुड़े प्रावधान भी शामिल किए गए हैं।
Source: IANS