आरबीआई एमपीसी फैसले से पहले भारतीय शेयर बाजार बढ़त के साथ हरे निशान में खुला, सेंसेक्स में 150 अंकों की बढ़त
वैश्विक तनावों के बीच हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को आने वाले आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक के नतीजों से पहले भारतीय शेयर बाजार बढ़त के साथ हरे निशान में खुला।।

मुंबई, 5 जून । वैश्विक तनावों के बीच हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को आने वाले आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक के नतीजों से पहले भारतीय शेयर बाजार बढ़त के साथ हरे निशान में खुला।
इस दौरान, 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद 74,360.01 से 269.93 अंक उछलकर 74,629.94 पर खुला, तो वहीं एनएसई निफ्टी 50 अपने पिछले बंद 23,416.55 से 62.4 अंक बढ़कर 23,478.95 पर खुला।
वहीं खबर लिखे जाने तक (सुबह करीब 9.38 बजे) सेंसेक्स 150.64 अंकों यानी 0.20 प्रतिशत की तेजी के साथ 74,510.65 पर था, जबकि निफ्टी50 32.75 अंक यानी 0.14 प्रतिशत चढ़कर 23,449.30 पर ट्रेड कर रहा था।
इस बीच, ब्रॉडर मार्केट में भी सकारात्मक रुख देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 0.44 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 0.23 प्रतिशत की बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे।
सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो निफ्टी मीडिया और निफ्टी रियल्टी के शेयरों में सबसे अच्छी तेजी देखने को मिली। इसके साथ ही, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज और निफ्टी ऑटो में भी अच्छी बढ़त देखने को मिली। वहीं दूसरी ओर, निफ्टी मेटल और ऑयल एंड गैस, निफ्टी आईटी और निफ्टी एफएमसीजी के शेयरों में कमजोरी नजर आई।
निफ्टी 50 इंडेक्स में एचडीएफसी लाइफ, बजाज फाइनेंस, अदाणी इंटरप्राइजेज, एसबीआई लाइफ और टेक महिंद्रा के शेयरों में सबसे ज्यादा बढ़त दर्ज की गई, जबकि विप्रो, हिंडाल्को, टाटा स्टील और ट्रेंट के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई।
गौरतलब है कि निवेशकों की नजरें आज आने वाले आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा के बयान पर टिकी हैं, जिससे महंगाई और आर्थिक विकास की दिशा को लेकर नए संकेत मिल सकते हैं।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय रिजर्व बैंक इस बार रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रख सकता है। ऐसे में निवेशक ब्याज दरों, महंगाई और ग्रोथ आउटलुक से जुड़े संकेतों पर खास ध्यान देंगे।
एक मार्केट एक्सपर्ट ने बताया कि ऊर्जा कीमतों में आए झटके और उसके व्यापक आर्थिक प्रभावों को देखते हुए आरबीआई वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जीडीपी वृद्धि अनुमान को थोड़ा कम कर सकता है। वहीं, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई के अनुमान को ऊपर की ओर संशोधित किए जाने की संभावना है।
एक्सपर्ट के मुताबिक, आरबीआई की सबसे संभावित रणनीति "हॉकिश होल्ड" हो सकती है। इसका मतलब है कि केंद्रीय बैंक फिलहाल ब्याज दरों को यथावत रखेगा, लेकिन साथ ही यह संकेत देगा कि आने वाले महीनों में महंगाई बढ़ने की आशंका है और इसी कारण वर्ष के अंत तक दरों में बढ़ोतरी की जरूरत पड़ सकती है।
उन्होंने आगे कहा कि यदि आरबीआई 25 बेसिस प्वाइंट (0.25 प्रतिशत) की ब्याज दर वृद्धि का फैसला करता है, तो बैंकिंग शेयरों में तेज उछाल देखने को मिल सकता है, क्योंकि बढ़ती ब्याज दरों से बैंकों की आय और मार्जिन को फायदा होता है।
हालांकि, ब्याज दरों में बढ़ोतरी का असर सभी सेक्टरों पर समान नहीं होगा। ऑटोमोबाइल और रियल एस्टेट जैसे ब्याज दरों के प्रति संवेदनशील क्षेत्रों पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। ऊंची ब्याज दरों से वाहन और घर खरीदने के लिए कर्ज महंगा हो जाता है, जिससे मांग प्रभावित हो सकती है।
Source: IANS
