अभी ई25 लागू करने की कोई जल्दबाजी नहीं, परीक्षण पूरे होने के बाद होगा

नई दिल्ली, 7 जुलाई । पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मंगलवार को स्पष्ट किया है कि सरकार फिलहाल ई25 ईंधन लागू करने की जल्दबाजी में नहीं है। उन्होंने कहा कि ई25 को लेकर परीक्षण जारी हैं और इनके नतीजे आने के बाद ही आगे का निर्णय लिया जाएगा। साथ ही सरकार ऑटोमोबाइल कंपनियों समेत सभी संबंधित पक्षों से चर्चा करेगी।

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि भारत पिछले साढ़े तीन वर्षों से ई15 ईंधन का उपयोग कर रहा है, जबकि ई20 को अप्रैल 2025 से लागू किया गया था। उन्होंने कहा कि ई20 लागू हुए एक वर्ष से अधिक समय हो चुका है और उसके बाद भी कई महीने बीत चुके हैं।

उन्होंने कहा, "यदि कोई यह कह रहा है कि भारत जल्द ही ई25 पर जाने वाला है, तो यह सही नहीं है। सरकार अभी ई25 को लेकर विभिन्न परीक्षण कर रही है और इन परीक्षणों में समय लगेगा। परीक्षण रिपोर्ट आने के बाद उनका मूल्यांकन किया जाएगा और फिर सभी हितधारकों, विशेष रूप से ऑटोमोबाइल निर्माताओं से चर्चा की जाएगी।"

केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि सरकार इस मामले में वाहन निर्माताओं की राय को भी महत्व देगी। उन्होंने कहा, "मैं न तो कार बनाता हूं और न ही ईंधन। इसलिए परीक्षण पूरे होने के बाद ऑटोमोबाइल कंपनियों सहित सभी संबंधित पक्षों से चर्चा की जाएगी।"

उन्होंने बताया कि फिलहाल वाहन निर्माता ई20 ईंधन को लेकर पूरी तरह सहज हैं और उपभोक्ताओं ने भी इसे स्वीकार किया है। वहीं ई85 ईंधन की शुरुआत अभी सीमित स्तर पर हुई है और इसके विस्तार में कुछ समय लगेगा, क्योंकि इसके लिए नए पेट्रोल पंपों और आवश्यक बुनियादी ढांचे का विकास किया जा रहा है।

केंद्रीय मंत्री ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे उन वीडियो को भी खारिज किया, जिनमें दावा किया जा रहा है कि ईंधन में बदलाव के कारण वाहन खराब हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी खबरें भ्रामक हैं और तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। लोगों को ऐसी अफवाहों पर विश्वास नहीं करना चाहिए।

इस बीच, एक कार्यक्रम में बोलते हुए केंद्रीय मंत्री पुरी ने अंडमान क्षेत्र में हुई गैस खोज को भी भारत के ऊर्जा क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि तीन अन्वेषण कुओं में से दो में प्राकृतिक गैस की खोज हुई है, जो केवल एक नई गैस खोज नहीं, बल्कि ऊर्जा आत्मनिर्भर भारत की दिशा में ऐतिहासिक कदम है।

उन्होंने कहा कि देश की घरेलू ऊर्जा उत्पादन क्षमता जितनी बढ़ेगी, विदेशी आयात पर निर्भरता उतनी ही कम होगी। इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी।

हरदीप सिंह पुरी ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पिछले वर्ष 15 अगस्त को शुरू किया गया 'समुद्र मंथन' अभियान केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि 'विकसित भारत' की ऊर्जा क्रांति की शुरुआत है। इस पहल का उद्देश्य समुद्री क्षेत्रों में ऊर्जा संसाधनों की खोज बढ़ाकर भारत को ऊर्जा के मामले में अधिक आत्मनिर्भर बनाना है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हाल के वैश्विक ऊर्जा संकट के दौरान सबसे बड़ा खतरा केवल पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता का नहीं था, बल्कि देश के 33 करोड़ से अधिक एलपीजी उपभोक्ताओं की रसोई तक गैस पहुंचाने का भी था।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने समय रहते कई निर्णायक कदम उठाए। प्रभावी कूटनीतिक प्रयासों के जरिए फंसे हुए ऊर्जा जहाजों को सुरक्षित निकाला गया और साथ ही देश में एलपीजी उत्पादन क्षमता को तेजी से बढ़ाया गया।

उन्होंने बताया कि भारत की घरेलू एलपीजी उत्पादन क्षमता को 35,000 मीट्रिक टन प्रतिदिन से बढ़ाकर 54,000 मीट्रिक टन प्रतिदिन कर दिया गया। इसी का परिणाम रहा कि पूरे संकट के दौरान देश में एलपीजी की आपूर्ति बिना किसी रुकावट के जारी रही और आम लोगों को किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा।

Source: IANS

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