ओला इलेक्ट्रिक ने जारी किए नतीजे, वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में परिचालन से आय सालाना आधार पर 55 प्रतिशत घटी

मुंबई, 13 फरवरी। इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन कंपनी ओला इलेक्ट्रिक ने शुक्रवार को वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही के नतीजे जारी किए। अक्टूबर-दिसंबर अवधि में कंपनी की परिचालन से आय सालाना आधार पर 55.02 प्रतिशत कम होकर 470 करोड़ रुपए रह गई है, जो कि पिछले साल समान अवधि में 1,045 करोड़ रुपए पर थी।  

दिसंबर तिमाही में कंपनी की कुल आय में भी बड़ी गिरावट देखी गई है और यह सालाना आधार पर 56.99 प्रतिशत कम होकर 504 करोड़ रुपए हो गई है, जो कि पिछले साल की समान अवधि में 1,172 करोड़ रुपए थी। 

ओला इलेक्ट्रिक लगातार घाटे में बनी हुई है। वित्त वर्ष 26 की दिसंबर तिमाही में कंपनी को 487 करोड़ रुपए का घाटा हुआ है, जो कि पिछले साल की समान अवधि में 564 करोड़ रुपए था। तिमाही आधार पर कंपनी के घाटे में बढ़ोतरी दर्ज की गई। सितंबर तिमाही में कंपनी को 418 करोड़ करोड़ रुपए का घाटा हुआ है।

वित्त वर्ष 26 की दिसंबर तिमाही में कंपनी के खर्च में कमी देखने को मिली है। अक्टूबर-दिसंबर अवधि में कंपनी का कुल खर्च 50.76 प्रतिशत कम होकर 741 करोड़ रुपए हो गया है, जो कि पिछले साल की समान अवधि में 1,505 करोड़ रुपए था। 

बड़ी बात यह है कि कंपनी के खर्च में कमी की वजह उत्पादन में लगने वाले मटेरियल की लागत कम होना है। वित्त वर्ष 26 की दिसंबर तिमाही में मटेरियल की लागत 223 करोड़ रुपए रही है, जो कि वित्त वर्ष 25 की दिसंबर तिमाही के मटेरियल पर खर्च 867 करोड़ रुपए से 74 प्रतिशत कम है। यह दिखाता है कि कंपनी के उत्पादन में कमी आ रही है। 

ओला इलेक्ट्रिक का शेयर शुक्रवार को 0.26 प्रतिशत की गिरावट के साथ 30.9 रुपए पर बंद हुआ है। दिन के दौरान इसने 52 हफ्तों का नया लो 30.41 रुपए बनाया। बीते एक साल में शेयर ने 51.90 प्रतिशत का नकारात्मक रिटर्न दिया है। इस साल की शुरुआत से अब तक शेयर 17.59 प्रतिशत गिर चुका है। 

मुश्किलों का सामना कर रही ओला इलेक्ट्रिक ने बीते महीने छंटनी की थी। ओला इलेक्ट्रिक ने कहा कि इस चल रहे संरचनात्मक परिवर्तन के तहत, लगभग 5 प्रतिशत कर्मचारी प्रभावित होंगे।

कंपनी ने आगे कहा कि वह ग्राहकों को बेहतर अनुभव प्रदान करने और दीर्घकालिक, लाभदायक विकास के लिए एक सुव्यवस्थित संगठन बनाने पर केंद्रित है।

ओला इलेक्ट्रिक के मुताबिक, वह अपने कारोबार को पटरी पर लाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है, हाइपरसर्विस और सेवा-आधारित निष्पादन के माध्यम से प्राप्त शुरुआती लाभों को आगे बढ़ा रही है, जिसके तहत अब देशभर में 80 प्रतिशत से अधिक सेवा अनुरोधों का उसी दिन समाधान किया जा रहा है।

Source: IANS

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