अमेरिकी फेड के रुख से अच्छी कंपनियों में निवेश का मौका: विशेषज्ञ

नई दिल्ली, 18 जून । अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा लगातार चौथी बैठक में ब्याज दरों को स्थिर रखने का फैसला बाजार की उम्मीदों के अनुरूप रहा। हालांकि, फेड के नए आर्थिक अनुमानों से यह संकेत मिला है कि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती हैं। ऐसा विशेषज्ञों ने गुरुवार को कहा।

विशेषज्ञों के अनुसार, फेड के नीति निर्माताओं में मतभेद अभी भी बने हुए हैं। लगभग आधे सदस्य इस साल कम से कम एक और बार ब्याज दर बढ़ाने के पक्ष में हैं। साथ ही, महंगाई के बढ़े हुए अनुमान और आर्थिक वृद्धि दर (जीडीपी) के कमजोर अनुमान यह दिखाते हैं कि फेड की प्राथमिकता अभी भी महंगाई पर नियंत्रण रखना है, भले ही इससे आर्थिक विकास की रफ्तार कुछ धीमी पड़ जाए।

एक्सिस डायरेक्ट के रिसर्च प्रमुख राजेश पलविया ने कहा कि वैश्विक शेयर बाजारों के लिए फेड का संदेश कुछ हद तक सख्त (हॉकिश) है, क्योंकि ब्याज दरों में जल्द कटौती की उम्मीदें अब और आगे खिसक गई हैं।

उन्होंने कहा, "भारतीय शेयर बाजार के लिए निवेश का बुनियादी आधार अभी भी मजबूत बना हुआ है। मजबूत घरेलू आर्थिक संकेतक, कंपनियों के अच्छे नतीजे, एसआईपी के जरिए लगातार निवेश और सरकार द्वारा बढ़ाया जा रहा पूंजीगत खर्च भारतीय बाजार को समर्थन दे रहे हैं।"

पलविया के अनुसार, निकट अवधि में बाजार की दिशा विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) के निवेश और रुपए की चाल से प्रभावित हो सकती है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर नकदी की उपलब्धता अभी भी सीमित बनी हुई है।

उन्होंने कहा कि फेड के रुख से यदि बाजार में अस्थिरता आती है, तो इसे मध्यम और लंबी अवधि के नजरिए से मजबूत और गुणवत्तापूर्ण कंपनियों में निवेश का अवसर माना जाना चाहिए।

फेड की दो दिवसीय बैठक के समापन पर, जो नए चेयरमैन केविन वॉर्श के नेतृत्व में पहली बैठक थी, केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों को 3.50 प्रतिशत से 3.75 प्रतिशत के दायरे में ही बनाए रखने का फैसला किया।

फेड के फैसले के बाद बुधवार को अमेरिकी शेयर बाजारों में गिरावट देखी गई, जबकि सरकारी बॉन्ड की प्रतिफल दरों (यील्ड) में तेज बढ़ोतरी हुई।

फेड ने ब्याज दरों को स्थिर रखा, लेकिन यह संकेत दिया कि महंगाई को नियंत्रित करने के लिए इस साल बाद में एक चौथाई प्रतिशत की और बढ़ोतरी की जरूरत पड़ सकती है।

इसका असर प्रमुख प्रौद्योगिकी कंपनियों के शेयरों पर भी दिखा। माइक्रोसॉफ्ट, मेटा प्लेटफॉर्म्स, अल्फाबेट और अमेजन जैसे बड़े तकनीकी शेयर गिरावट के साथ बंद हुए।

वहीं, एचडीएफसी सिक्योरिटीज के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट नंदीश शाह ने कहा कि फेड के कारण आई गिरावट के बाद अमेरिकी शेयर वायदा बाजार में फिर से तेजी देखी जा रही है।

उन्होंने कहा, "निवेशकों को उम्मीद है कि अमेरिका और ईरान के बीच जल्द ही शांति समझौता हो सकता है, जिससे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से खुल सकता है। इसी उम्मीद ने बाजार को नया सहारा दिया है।"

Source: IANS

अन्य समाचार

Advertisement

Advertisement

Advertisement

Get Newsletter

Advertisement