लगातार दूसरे दिन गिरा बाजार, सेंसेक्स 539 अंक फिसला; निफ्टी 0.48 प्रतिशत नीचे

मुंबई, 27 अगस्त । पश्चिम एशिया में जारी तनावों के बीच वैश्विक बाजारों के मिले-जुले संकेतों के चलते हफ्ते के चौथे कारोबारी दिन गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार लगातार दूसरे दिन गिरावट के साथ लाल निशान में बंद हुआ। इस दौरान मेटल, पीएसयू बैंकों और सीमेंट के शेयरों में गिरावट के चलते घरेलू बाजार के प्रमुख बेंचमार्कों निफ्टी और सेंसेक्स में 0.70 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।

बाजार बंद होने के समय 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 539.35 अंक यानी 0.70 प्रतिशत गिरकर 76,933.59 पर पहुंच गया, जबकि एनएसई निफ्टी50 116.90 अंक यानी 0.48 प्रतिशत गिरकर 24,090.85 पर आ गया।

व्यापक बाजार में, निफ्टी मिडकैप 100 में 0.10 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 0.13 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

वहीं, सेक्टरवार देखें तो निफ्टी सीमेंट में सबसे ज्यादा 1.33 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके साथ ही निफ्टी पीएसयू बैंक में 0.94 प्रतिशत, निफ्टी मीडिया में 89 प्रतिशत, निफ्टी मेटल में 0.86 प्रतिशत और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में 0.51 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली। वहीं, निफ्टी फार्मा, निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और निफ्टी प्राइवेट बैंक ने बेहतर प्रदर्शन किया।

निफ्टी50 इंडेक्स में अदाणी इंटरप्राइजेस, कोटक महिंद्रा बैंक, अदाणी पोर्ट्स, सिप्ला और बीईएल के शेयरों में सबसे ज्यादा बढ़त दर्ज की गई और ये दिन के टॉप गेनर्स की लिस्ट में शामिल रहे, जबकि हिंडाल्को, एचडीएफसी बैंक, महिंद्रा एंड महिंद्रा, श्रीराम फाइनेंस, ग्रासिम इंडस्ट्रीज, एचसीएल टेक, भारती एयरटेल और रिलायंस के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई और ये शीर्ष नुकसान उठाने वाले शेयरों में शामिल रहे।

एक मार्केट एक्सपर्ट ने बताया कि एक्सपायरी की वजह से होने वाली उठा-पटक और मिडिल ईस्ट में किसी कूटनीतिक सफलता की कमी के चलते फिलहाल बाजार एक दायरे में ही बने हुए हैं। हालांकि कंपनियों की कमाई के अनुमानों में ऊर्जा की ऊंची कीमतों का असर काफी हद तक शामिल है, लेकिन हाल ही में कच्चे तेल की कीमतों और लॉन्ग-टर्म बॉन्ड यील्ड में आई कमी से महंगाई के मोर्चे पर राहत मिलने की उम्मीद बनी है।

एक्सपर्ट ने आगे कहा, "इस बीच, एफआईआई का निवेश और कंपनियों की कमाई में लगातार मजबूती भारतीय शेयरों, खासकर मिड-कैप शेयरों के लिए मददगार बनी हुई है। मिड-कैप के कई सेक्टर ग्लोबल अनिश्चितताओं से काफी हद तक बचे हुए हैं और घरेलू बाजार में मजबूत मांग का फायदा उठा रहे हैं।"

एक्सपर्ट के अनुसार, निवेशक फेड चेयरमैन के नए चेयरमैन केविन वॉर्श के आने वाले जैक्सन होल सम्मेलन में भाषण पर भी बारीकी से नजर रखेंगे। इस भाषण से महंगाई, ब्याज दरों और पॉलिसी आउटलुक के बारे में संकेत मिल सकते हैं, जिनका असर ग्लोबल रिस्क सेंटीमेंट और उभरते बाजारों में पूंजी के प्रवाह पर पड़ सकता है।

Source: IANS

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