उपभोक्ता आयोग ने ओला इलेक्ट्रिक को खराब स्कूटर बदलने या रिफंड देने का दिया आदेश

मुंबई, 29 मार्च। ठाणे के उपभोक्ता आयोग ने दोपहिया ईवी कंपनी ओला इलेक्ट्रिक को खराब इलेक्ट्रिक स्कूटर को बदलने या फिर ग्राहक को रिफंड देने का आदेश दिया है।  

आयोग ने यह आदेश सर्विस में गंभीर अनियमितता और अनुचित व्यापार प्रथाओं के चलते दिया है। 

जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने अपने आदेश में कहा कि स्कूटर में शुरू से ही कई खामियां थीं और कंपनी इन समस्याओं का उचित समाधान करने में विफल रही।

आयोग ने कंपनी के इस आचरण को ग्राहक सेवा में बड़ी लापरवाही बताया।

यह मामला नवी मुंबई के एक वकील ने दायर किया था, जिन्होंने जुलाई 2024 में 96,997 रुपए में स्कूटर खरीदा था।

शिकायत के अनुसार, वाहन की डिलीवरी के महज दो दिन बाद ही उसमें समस्याएं शुरू हो गईं।

अपनी पहली लंबी यात्रा के दौरान, स्कूटर में एक्सीलरेशन से संबंधी समस्याएं आईं और ट्रैफिक में कई बार खराब हो गया।

शिकायतकर्ता ने बैटरी की गंभीर समस्या के बारे में भी बताया और दावा किया कि अगस्त 2024 में एक यात्रा के दौरान, चार्ज का स्तर अचानक महज 500 मीटर के भीतर 21 प्रतिशत से घटकर 3 प्रतिशत हो गया, जिससे वाहन अचानक रुक गया। उन्होंने कहा कि इस घटना से एक बड़ा हादसा हो सकता था।

ग्राहक ने आरोप लगाया कि बार-बार ईमेल और संदेश भेजने के बावजूद कंपनी से उसे तब तक कोई जवाब नहीं मिला, जब तक उसने इस मुद्दे को सोशल मीडिया पर सार्वजनिक रूप से नहीं उठाया।

स्कूटर को सर्विसिंग के लिए ले जाने के बाद भी देरी हुई और कोई अपडेट नहीं मिला। आयोग ने पाया कि शुरुआत में वाहन की जानकारी निर्धारित गैरेज को भी नहीं दी गई थी।

आदेश में कहा गया है कि जब स्कूटर महीनों बाद लौटाया गया, तो वह खराब हालत में था, उस पर खरोंचें थीं और साफ-सफाई की समस्या थी।

आयोग ने पाया कि पहली सवारी से ही समस्याओं का सिलसिला यह दर्शाता है कि दोपहिया वाहन खराब था। 

आयोग ने कहा कि कंपनी समय पर अपडेट देने में विफल रही और उसने वाहन को लंबे समय तक रोके रखा, जो खराब सर्विस और अनुचित व्यापार प्रथा दोनों का मामला है।

अपने फैसले में, आयोग ने कंपनी को स्कूटर को समान फीचर्स वाले नए स्कूटर से बदलने का निर्देश दिया।

यदि प्रतिस्थापन संभव नहीं है, तो उसे ग्राहक द्वारा भुगतान की गई पूरी राशि 6 ​​प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित वापस करनी होगी।

इसके अतिरिक्त, कंपनी को मानसिक पीड़ा के मुआवजे के रूप में 20,000 रुपए और कानूनी खर्चों के लिए 15,000 रुपए का भुगतान करने का आदेश दिया गया है।

हालांकि, कंपनी आयोग के समक्ष पेश नहीं हुई और न ही उसने कोई जवाब दाखिल किया, इसलिए मामले का फैसला एकतरफा किया गया।

Source: IANS

अन्य समाचार

Advertisement

Advertisement

Advertisement

Get Newsletter

Advertisement