पीएम स्वनिधि योजना ने बदली श्रीनगर के वेंडर की तकदीर, शकील बोले- कोविड संकट में मिला कारोबार को नया जीवन

जम्मू, 1 जून । प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्‍वनिधि) छह साल पहले 1 जून, 2020 को एक अहम केंद्र सरकार की योजना के तौर पर शुरू हुई थी।

इसका मकसद कोरोना महामारी के बाद के दौर में स्ट्रीट वेंडरों को अपना कारोबार चालू रखने में मदद करना था। यह योजना धीरे-धीरे छोटे कारोबारों को नया रूप देने और उन्हें फिर से खड़ा करने में एक अहम सहारा बनकर उभरी है।

पूरे भारत में मौजूद इस योजना ने जम्मू-कश्मीर के छोटे कारोबारियों और वेंडरों की जिंदगी में भी एक बड़ा बदलाव ला दिया है।

श्रीनगर के शकील अहमद भट्ट ने आईएएनएस से ​​बात करते हुए बताया कि कैसे पीएम स्‍वनिधि योजना उनके परिवार के लिए उम्मीद की एक नई किरण बनकर आई, और इसने कारोबार को बढ़ावा दिया, आमदनी बढ़ाई, और घाटी में उनके जैसे कई लोगों को सशक्त बनाया।

शकील सड़कों पर कपड़े बेचकर अपना गुजारा करते थे। कम आमदनी की वजह से उन्हें अक्सर घर के खर्च पूरे करने और अपने बच्चों की पढ़ाई-लिखाई का खर्च उठाने में मुश्किल होती थी।

लेकिन, पीएम स्‍वनिधि के तहत बिना किसी गारंटी के मिलने वाले लोन ने उन्हें अपने कारोबार को बढ़ाने और अपनी कमाई बेहतर करने में मदद की। आज, उनका कारोबार कई गुना बढ़ गया है, जिससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।

पीएम स्‍वनिधि योजना के तहत लोन लेने के बाद उनकी हालत सुधरने लगी। इस आर्थिक मदद का इस्तेमाल करके, उन्होंने कपड़ों का और स्टॉक खरीदा और ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए नई चीजें बेचना शुरू किया। जैसे-जैसे उनकी बिक्री बढ़ी, उन्होंने समय पर लोन चुका दिया और इस योजना के तहत और लोन भी लिए।

उन्होंने पीएम स्‍वनिधि सहायता की तीसरी किस्त भी ले ली है, जैसा कि इस योजना में प्रावधान है, और इससे उनके कारोबार को जबरदस्त तरीके से बढ़ने में मदद मिली है। आमदनी में हुए इस उछाल ने उनके परिवार की आर्थिक हालत को बेहतर बनाया है और उन्हें अपने कारोबार को और आगे बढ़ाने का आत्मविश्वास भी दिया है।

शकील के लिए, पीएम स्‍वनिधि योजना एक बेहतर भविष्य की ओर बढ़ाया गया पहला कदम साबित हुआ, जिसने उन्हें अपने छोटे से सड़क पर कपड़े बेचने के कारोबार को एक बढ़ते हुए उद्यम में बदलने में मदद की।

शकील बताते हैं कि अगर यह योजना शुरू न हुई होती, तो कोविड-19 महामारी के दौरान उनके कारोबार को बहुत ज्‍यादा नुकसान पहुंचता, और शायद उनका कारोबार पूरी तरह से बंद होने की कगार पर पहुंच जाता।

खास बात यह है कि पीएम स्‍वनिधि योजना महामारी के दौरान शुरू की गई थी, ताकि उन रेहड़ी-पटरी वालों को सस्ते वर्किंग कैपिटल लोन दिए जा सकें, जिनका कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ था।

जून 2020 में शुरू होने के बाद से, पीएम स्‍वनिधि योजना के तहत 1.12 करोड़ से ज्‍यादा बिना किसी गारंटी वाले लोन बांटे जा चुके हैं, जिनकी कुल कीमत 17,800 करोड़ रुपए से ज्‍यादा है।

इस योजना से पूरे शहरी भारत में 75.5 लाख से ज्‍यादा रेहड़ी-पटरी वालों को फायदा हुआ है। इससे उन्हें औपचारिक लोन लेने, डिजिटल पेमेंट अपनाने और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ उठाने में मदद मिली है।

Source: IANS

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