सोमवती अमावस्या पर हरिद्वार में उमड़ा आस्था का सैलाब, लाखों श्रद्धालुओं ने किया गंगा स्नान

हरिद्वार, 15 जून । धर्मनगरी हरिद्वार में सोमवती अमावस्या के पावन पर्व पर आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। सुबह तड़के से ही हर की पौड़ी समेत गंगा के प्रमुख घाटों पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा।

लाखों श्रद्धालुओं ने मां गंगा में आस्था की डुबकी लगाकर पूजा-अर्चना की। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट रहा, चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात किया गया। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित और एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर ने खुद ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया और अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए।

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रवींद्र पुरी ने बताया कि लगभग तीन सौ वर्षों बाद ज्योतिषीय गणना के अनुसार ऐसा दुर्लभ योग बना है। ग्रहों की वर्तमान स्थिति, समवर्ती अमावस्या और अधिक मास का यह संयोग बना है। यह अपने आप में अत्यंत विशेष है। हरिद्वार सहित प्रयागराज, सरयू तट (अयोध्या) तथा अन्य सभी तीर्थस्थलों के लिए इसका विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि जो लोग पूरे मास व्रत रखते हैं, उन्हें सोमवती अमावस्या के दिन अपने पूर्वजों और पितरों का तर्पण करना चाहिए। जहां-जहां नदियां और संगम हैं, वहां स्नान करना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति घर पर ही है, तो वह स्नान के जल में थोड़ा-सा गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकता है और अपने पूर्वजों का स्मरण कर सकता है। अमावस्या के दिन पितृ-तर्पण का विशेष महत्व माना गया है। अपने पितरों की मुक्ति और कल्याण के लिए प्रार्थना करनी चाहिए। यह एक अत्यंत शुभ और सुलभ योग है।

रवींद्र पुरी ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने भगवद्गीता में कहा है, "वृक्षों में मैं अश्वत्थ (पीपल) हूं, देवर्षियों में नारद हूं, सिद्धों में कपिल मुनि हूं और गंधर्वों में चित्ररथ हूं।" इसलिए संसार के समस्त वृक्षों में पीपल का विशेष स्थान है। पीपल एक ऐसा वृक्ष माना जाता है जो चौबीसों घंटे ऑक्सीजन प्रदान करता है। इसी कारण हमारे ऋषियों ने इसकी पूजा और संरक्षण की परंपरा स्थापित की। पीपल का अभिषेक कर उसे जल अवश्य अर्पित करना चाहिए।

उन्होंने बताया कि सोमवती अमावस्या के दिन सर्वप्रथम गंगा स्नान करना चाहिए और उसके बाद भगवान शिव का अभिषेक करना चाहिए। तत्पश्चात मध्याह्न काल में, लगभग 11.30 बजे से 12 बजे के बीच, अपने कुल के दिवंगत सदस्यों अर्थात पितरों का तर्पण करना चाहिए। साथ ही, जरूरतमंद ब्राह्मणों को यथाशक्ति दान-दक्षिणा देनी चाहिए तथा उन्हें भोजन भी कराना चाहिए।

सोमवती अमावस्या को लेकर श्रद्धालुओं में भी खासा उत्साह देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने बताया कि इस दिन गंगा स्नान, दान-पुण्य और पितरों का तर्पण करने का विशेष महत्व माना जाता है। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने कहा कि ज्योतिष गणना के अनुसार करीब 300 साल बाद जेठ माह में ऐसा विशेष संयोग बना है। उन्होंने बताया कि हरिद्वार, प्रयागराज और अयोध्या जैसे तीर्थ स्थलों पर स्नान और तर्पण करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। फिलहाल हरिद्वार में श्रद्धा, सुरक्षा और प्रशासनिक तैयारियों के बीच सोमवती अमावस्या का स्नान सकुशल जारी है।

जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने बताया कि सोमवती अमावस्या का स्नान लगातार जारी है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा घाटों पर पहुंच रहे हैं। प्रशासन की ओर से घाटों पर सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। वहीं एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर ने बताया कि मेले को सकुशल संपन्न कराने के लिए 6 सुपर जोन, 16 जोन और 40 सेक्टर बनाए गए हैं, जिनमें डिप्टी एसपी, सीओ, इंस्पेक्टर और सब इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारियों की तैनाती की गई है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, बीडीएस और डॉग स्क्वायड टीमों को भी लगाया गया है।

एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर ने कहा कि सुरक्षा के लिए एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें तैनात की गई हैं। सुरक्षा जांच के लिए बम डिस्पोजल स्क्वाड (बीडीएस) और डॉग स्क्वाड भी तैनात हैं। साथ ही, अन्य सुरक्षा बल भी तैनात किए गए हैं। इसके अलावा, बीएसी और सीपीए टीमें भी मौजूद हैं।

Source: IANS

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