गुजरात ने 2.19 करोड़ किसानों को 'सॉइल हेल्थ कार्ड' जारी किए

गांधीनगर, 17 फरवरी। गुजरात ने साइंटिफिक सॉइल मैनेजमेंट को बढ़ावा देने और फसल उत्पादकता में सुधार लाने के उद्देश्य से शुरू की गई सॉइल हेल्थ कार्ड (एसएचसी) योजना के अंतर्गत 2.19 करोड़ किसानों को सॉइल हेल्थ कार्ड जारी किए हैं।

यह योजना सर्वप्रथम 2003-04 में शुरू की गई थी, जब वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे।

इस पहल के साथ गुजरात किसानों के लिए एक संरचित मृदा परीक्षण और परामर्श कार्यक्रम लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया।

बाद में 2015-16 में इस कार्यक्रम का राष्ट्रव्यापी विस्तार किया गया। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में, राज्य ने किसानों की आय बढ़ाने और मृदा की उर्वरता बनाए रखने के घोषित उद्देश्य के साथ इस योजना का कार्यान्वयन जारी रखा है।

सॉइल हेल्थ कार्ड किसानों को 12 मृदा मापदंडों की जानकारी प्रदान करता है: नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटेशियम, आयरन, कॉपर, जिंक, कार्बनिक कार्बन, सल्फर, बोरॉन और मैंगनीज।

प्रयोगशाला विश्लेषण के आधार पर, किसानों को उपयुक्त उर्वरकों के प्रकार और मात्रा के बारे में वैज्ञानिक अनुशंसाएं प्राप्त होती हैं।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, योजना के पहले चरण (2003-04 से 2010-11) में गुजरात के 43.03 लाख से अधिक किसानों को शामिल किया गया था। दूसरे चरण (2011-12 से 2015-16) के दौरान लगभग 46.92 लाख किसानों को सॉइल हेल्थ कार्ड जारी किए गए।

केंद्रीय सरकार के कार्यक्रम के तहत तीसरे चरण (2016-17 से) में राज्य के 1.25 करोड़ से अधिक किसानों को कार्ड प्राप्त हुए हैं।

2024-25 में, एसएचसी पोर्टल के माध्यम से कुल 6,23,844 मृदा नमूने एकत्र किए गए, जिनमें से 6,23,295 नमूनों का विश्लेषण किया गया। 2025-26 के लिए गुजरात में परीक्षण का लक्ष्य 6,25,513 नमूने निर्धारित किया गया है।

अब तक 6,13,355 नमूने एकत्र किए जा चुके हैं, जिनमें से 4,86,142 का विश्लेषण किया जा चुका है, और शेष नमूनों की जांच जारी है।

वर्तमान में, गुजरात में कृषि विभाग के अंतर्गत 19 मृदा परीक्षण प्रयोगशालाएं और एक सूक्ष्म तत्व परीक्षण प्रयोगशाला कार्यरत हैं।

Source: IANS

अन्य समाचार

Advertisement

Advertisement

Advertisement

Get Newsletter

Advertisement