देहरादून में 23 अक्टूबर से विरासत महोत्सव, 15 दिन तक होंगे सांस्कृतिक कार्यक्रम
देहरादून में 23 अक्टूबर से 6 नवंबर तक 31वां विरासत कला एवं धरोहर महोत्सव आयोजित होगा। जानें कलाकारों की प्रस्तुतियां, थिएटर फेस्ट, कार्यक्रम और टिकट शुल्क की जानकारी।
देहरादून, 22 अक्टूबर । उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में कला, संगीत और सांस्कृतिक विरासत का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। विरासत कला एवं धरोहर महोत्सव का 31वां संस्करण 23 अक्टूबर से 6 नवंबर तक आयोजित किया जाएगा। नींबूवाला स्थित हिमालयन सांस्कृतिक केंद्र में होने वाले इस 15 दिवसीय महोत्सव में देश-विदेश के कलाकार संगीत, नृत्य, लोककला और रंगमंच की प्रस्तुतियों से समां बांधेंगे। इस बार महोत्सव में पहली बार थिएटर फेस्ट भी आयोजित किया जाएगा।
छोलिया नृत्य और शास्त्रीय संगीत से होगा आगाज
रूरल एंटरप्रेन्योरशिप फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज (रीच) की ओर से आयोजित इस महोत्सव की शुरुआत उत्तराखंड के पारंपरिक छोलिया नृत्य और उप्रेती बहनों की लोक संगीत प्रस्तुति से होगी। उद्घाटन संध्या में प्रख्यात शास्त्रीय गायक पंडित साजन मिश्रा और स्वरांश मिश्रा की प्रस्तुति विशेष आकर्षण रहेगी।
महोत्सव के दौरान हिंदुस्तानी और कर्नाटक शास्त्रीय संगीत, सूफी गायन, गजल, कथक, भरतनाट्यम, ओडिसी और विभिन्न लोक कलाओं की प्रस्तुतियां आयोजित की जाएंगी। इसके जरिए दर्शकों को देश की विविध सांस्कृतिक परंपराओं को करीब से जानने का अवसर मिलेगा।
परवीन सुल्ताना से इंडियन ओशन बैंड तक बिखरेगा संगीत का जादू
विरासत महोत्सव में इस बार कई नामचीन कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे। इनमें बेगम परवीन सुल्ताना, टीएम कृष्णा, जसबीर जस्सी, महेश काले, राहुल देशपांडे, ओसमान मीर और इंडियन ओशन बैंड शामिल हैं।
उत्तराखंड की गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी लोक संस्कृति को भी महोत्सव में प्रमुखता दी जाएगी। इसके अलावा श्रीलंका और कजाकिस्तान के कलाकार अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय लोक कलाओं की झलक पेश करेंगे।
संगीत और नृत्य के साथ लोक नाट्य 'चक्रव्यूह', साहित्यिक सत्र, मुशायरा और कविता पाठ जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। इससे महोत्सव में कला के साथ साहित्य और रंगमंच के प्रेमियों को भी अपनी पसंद के कार्यक्रम देखने का मौका मिलेगा।
हस्तशिल्प, पारंपरिक व्यंजन और विंटेज वाहन भी होंगे आकर्षण
महोत्सव में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के अलावा हस्तशिल्प बाजार और पारंपरिक खानपान की भी व्यवस्था रहेगी। यहां शिल्पकार अपने उत्पाद प्रदर्शित करेंगे, जिससे स्थानीय कला और पारंपरिक हस्तशिल्प को प्रोत्साहन मिलेगा। विद्यार्थियों के लिए रचनात्मक गतिविधियां और कला आधारित कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।
विंटेज कार एवं मोटरसाइकिल रैली इस आयोजन के प्रमुख आकर्षणों में शामिल होगी। इस तरह महोत्सव में संगीत, नृत्य, साहित्य, शिल्प और पुरानी गाड़ियों से जुड़ी विरासत का संगम देखने को मिलेगा।
पहली बार प्रवेश के लिए देना होगा 50 रुपये शुल्क
इस बार महोत्सव के आयोजन स्थल में बदलाव किया गया है। साथ ही प्रवेश व्यवस्था में भी परिवर्तन किया गया है। आयोजकों के मुताबिक, पहली बार महोत्सव परिसर में प्रवेश के लिए 50 रुपये प्रतिदिन का शुल्क निर्धारित किया गया है। वहीं, मुख्य सभागार में आयोजित होने वाले चुनिंदा कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए अलग से टिकट लेना होगा।
आयोजकों का उद्देश्य भारतीय कला, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को व्यापक मंच उपलब्ध कराना है। साथ ही, नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने और स्थानीय कलाकारों एवं शिल्पकारों को प्रोत्साहित करने पर भी जोर दिया जा रहा है।




Source: The News Com Network