वडोदरा के ईएमई स्कूल में नेपाली सैनिकों को मिला लाइट फील्ड गन का विशेष प्रशिक्षण, 4 सप्ताह में इसका इस्तेमाल सीखा
गुजरात के वडोदरा स्थित इलेक्ट्रॉनिक्स और मैकेनिकल इंजीनियर्स कोर (ईएमई) स्कूल में भारतीय सेना ने नेपाल सेना के प्रशिक्षुओं के लिए 105 मिमी लाइट फील्ड गन (एलएफजी) पर चार सप्ताह का एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित किया।
वडोदरा, 30 मार्च। गुजरात के वडोदरा स्थित इलेक्ट्रॉनिक्स और मैकेनिकल इंजीनियर्स कोर (ईएमई) स्कूल में भारतीय सेना ने नेपाल सेना के प्रशिक्षुओं के लिए 105 मिमी लाइट फील्ड गन (एलएफजी) पर चार सप्ताह का एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित किया।
इस प्रशिक्षण का उद्देश्य तोपखाना प्रणालियों के रखरखाव, मरम्मत और संचालन से जुड़ी तकनीकी दक्षताओं को सुदृढ़ करना था, ताकि सैनिक विभिन्न परिस्थितियों में इन हथियारों का प्रभावी उपयोग कर सकें।
इस कोर्स के दौरान प्रतिभागियों को 105 मिमी एलएफजी की संरचना, कार्यप्रणाली और नियमित रखरखाव के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। साथ ही, उन्नत मरम्मत तकनीकों, फॉल्ट डायग्नोसिस और सिस्टम की दीर्घकालिक कार्यक्षमता सुनिश्चित करने के उपायों पर विशेष जोर दिया गया। प्रशिक्षण में व्यावहारिक अभ्यास को प्राथमिकता दी गई, जिससे प्रशिक्षु वास्तविक परिस्थितियों में आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकें।
कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण पहलू ऑपरेशनल तैयारी को मजबूत करना भी था। प्रशिक्षुओं को सिखाया गया कि कैसे कठिन और विविध भौगोलिक परिस्थितियों जैसे पहाड़ी इलाकों या सीमावर्ती क्षेत्रों में तोपखाना प्रणालियों को सक्रिय और प्रभावी बनाए रखा जाए। इससे न केवल उनकी तकनीकी क्षमता में वृद्धि हुई, बल्कि सामरिक दृष्टि से भी उनकी समझ विकसित हुई।
इस प्रशिक्षण ने दोनों देशों के बीच ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा दिया। भारतीय सेना के विशेषज्ञ प्रशिक्षकों ने अपने अनुभव और विशेषज्ञता साझा की, जबकि नेपाली प्रशिक्षुओं ने भी अपने परिचालन अनुभवों को साझा किया। इस पारस्परिक सहयोग से दोनों सेनाओं के बीच पेशेवर समझ और तालमेल और मजबूत हुआ।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। यह पहल भारत और नेपाल के बीच लंबे समय से चले आ रहे मैत्रीपूर्ण संबंधों को और मजबूत करती है।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल तकनीकी कौशल के विकास में सहायक साबित हुआ, बल्कि इसने द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को नई मजबूती प्रदान की। भारतीय सेना की यह पहल भविष्य में भी ऐसे सहयोगात्मक प्रयासों को आगे बढ़ाने की उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
Source: IANS