उत्तराखंड में अगले 6 माह के लिए एस्मा लागू, सरकारी कर्मचारियों की हड़ताल पर रोक
उत्तराखंड सरकार ने अगले 6 माह के लिए एस्मा (ESMA) लागू कर दिया है। इस अवधि में सरकारी कर्मचारी हड़ताल नहीं कर सकेंगे। सरकार ने आवश्यक सेवाओं को सुचारु बनाए रखने और जनहित को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया है।

देहरादून, 30 जुलाई । उत्तराखंड सरकार ने राज्य में आवश्यक सेवाओं को निर्बाध बनाए रखने के उद्देश्य से बड़ा फैसला लेते हुए आगामी छह माह के लिए एसेंशियल सर्विसेज मेंटेनेंस एक्ट (ESMA) लागू कर दिया है। इस आदेश के प्रभावी रहने के दौरान सरकारी कर्मचारी किसी भी प्रकार की हड़ताल, कार्य बहिष्कार या ऐसी गतिविधियों में शामिल नहीं हो सकेंगे, जिससे आवश्यक सरकारी सेवाएं प्रभावित हों।
राज्य सरकार के अनुसार, यह निर्णय आम जनता को बिना किसी बाधा के आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराने और जनहित की रक्षा के उद्देश्य से लिया गया है। सरकार का कहना है कि स्वास्थ्य, पेयजल, बिजली, परिवहन, आपदा प्रबंधन, राजस्व और अन्य जरूरी सरकारी सेवाओं का नियमित संचालन सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है।
क्या है एस्मा (ESMA)?
एसेंशियल सर्विसेज मेंटेनेंस एक्ट (Essential Services Maintenance Act) एक ऐसा कानून है, जिसके तहत सरकार आवश्यक सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों की हड़ताल पर अस्थायी रूप से रोक लगा सकती है। यदि किसी कर्मचारी या संगठन द्वारा इस कानून का उल्लंघन किया जाता है, तो उसके खिलाफ संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
सरकार ने क्यों लिया यह फैसला?
सरकार का कहना है कि किसी भी प्रकार की हड़ताल का सीधा असर आम नागरिकों पर पड़ता है। विशेष रूप से स्वास्थ्य सेवाएं, बिजली आपूर्ति, जलापूर्ति, परिवहन और प्रशासनिक कार्य प्रभावित होने से जनजीवन बाधित होता है। इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अगले छह माह तक राज्य में एस्मा लागू करने का निर्णय लिया गया है।
इन सेवाओं पर रहेगा विशेष ध्यान
सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस अवधि में आवश्यक सेवाओं से जुड़े विभागों को निर्बाध रूप से कार्य करना होगा। संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे सेवाओं के संचालन पर लगातार निगरानी रखें और किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न न होने दें।
कर्मचारियों पर क्या होगा असर?
एस्मा लागू रहने के दौरान सरकारी कर्मचारी और आवश्यक सेवाओं से जुड़े कार्मिक हड़ताल या कार्य बहिष्कार नहीं कर सकेंगे। यदि कोई कर्मचारी या संगठन आदेश का उल्लंघन करता है, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
सरकार का कहना है कि इस निर्णय का उद्देश्य किसी कर्मचारी के अधिकारों का हनन करना नहीं, बल्कि राज्य में आवश्यक सेवाओं की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करना और आम नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा से बचाना है।
Source: The News Com Network

