गोवा में डिजिटल अरेस्ट ठगी का पर्दाफाश, 42 लाख की धोखाधड़ी में 20

पणजी, 24 अगस्त । गोवा में साइबर ठगों के 'डिजिटल अरेस्ट' के बड़े मामले में पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की है। गोवा साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन ने 42 लाख रुपए से अधिक की धोखाधड़ी के मामले में एक आरोपी को महाराष्ट्र के नांदेड़ से गिरफ्तार किया है।

पुलिस के अनुसार, यह मामला गोवा के कैनाकोना निवासी की शिकायत पर 20 मार्च को दर्ज किया गया था। इस संबंध में क्राइम नंबर 29/2026 दर्ज कर भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 318(4), 319(2), 308 और धारा 3(5) के साथ-साथ आईटी एक्ट की धारा 66-डी के तहत मामला दर्ज किया गया था।

शिकायत के अनुसार, 30 जनवरी से 21 फरवरी के बीच आरोपी ने अपने साथियों के साथ मिलकर कई मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल किया। आरोपियों ने खुद को डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशन्स और दिल्ली व मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर पीड़ित को फोन किया।

आरोपियों ने शिकायतकर्ता को डराया कि उसका आधार कार्ड जेट एयरवेज के अधिकारियों से जुड़ी कथित आपराधिक गतिविधियों में इस्तेमाल हुआ है और वह एक आपराधिक मामले में फंसा है। इसी झूठे आरोप के आधार पर उसे 'डिजिटल अरेस्ट' में रखा गया और इस मनगढ़ंत मामले को सुलझाने के नाम पर कुल 42,60,094.40 रुपए ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया गया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर क्राइम पुलिस ने गहरी तकनीकी और वित्तीय जांच शुरू की। जांच में मनी ट्रेल का पता लगाते हुए संदिग्ध की लोकेशन महाराष्ट्र के नांदेड़ में मिली। इसके बाद गोवा साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन के पीआई दीपक पेडनेकर की देखरेख में पीएसआई नवीन नाइक, पीसी यश कोले और पीसी सिद्रमैया मठ की टीम ने नांदेड़ में छापा मारकर 20 वर्षीय तेजस नरहारे को गिरफ्तार कर लिया।

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि मनी ट्रेल के दूसरे चरण यानी लेयर-2 में आरोपी के बैंक खाते में 10 लाख रुपए जमा किए गए थे। यह रकम बाद में सेल्फ-चेक के जरिए निकाल ली गई। पुलिस ने आरोपी के खाते और लेन-देन से जुड़े दस्तावेज भी खंगाले हैं।

गिरफ्तार आरोपी को अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस का कहना है कि इस रैकेट में और भी लोग शामिल हो सकते हैं और उनके अन्य साथियों की तलाश जारी है।

Source: IANS

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