मेड इन इंडिया- ए टाइटन स्टोरी : प्रेरणा, संघर्ष और सफलता की दमदार कहानी (रिव्यू)
बहुत कम ही कोई सीरीज ऐसी होती है जो प्रेरणादायक होने के साथ ही सिनेमाई तौर पर भी बेहद दिलचस्प हो, लेकिन 'मेड इन इंडिया- ए टाइटन स्टोरी' ठीक यही कर दिखाती है और वह भी कमाल की बारीकी के साथ।

***** 5 स्टार्स
बहुत कम ही कोई सीरीज ऐसी होती है जो प्रेरणादायक होने के साथ ही सिनेमाई तौर पर भी बेहद दिलचस्प हो, लेकिन 'मेड इन इंडिया- ए टाइटन स्टोरी' ठीक यही कर दिखाती है और वह भी कमाल की बारीकी के साथ।
कहानी: जहां सोच और विरासत का मिलन होता है-
यह कहानी मुख्य रूप से 'भरोसे' के बारे में है- वही भरोसा जो बड़ी संस्थाओं की नींव रखता है। यह ज़ेरक्सेस देसाई के सफर को दिखाती है, जो एक बड़े सपने से प्रेरित थे और जे.आर.डी. टाटा का उन पर अटूट विश्वास था। यह सिर्फ 'टाइटन वॉच' बनने की कहानी नहीं है, बल्कि एक ऐसी सोच की कहानी है जिसने छोटे दायरे में रहने से इनकार कर दिया। यह महत्वाकांक्षा, जोखिम लेने की हिम्मत और उस गहरे भरोसे की ताकत के बारे में है, जो सपनों को हकीकत में बदलकर एक बड़ी विरासत बना देता है।
कलाकारों का प्रदर्शन, जो दिल में बस जाते हैं -
जिम सर्भ ने अब तक के अपने सबसे बहुआयामी परफॉर्मेंस में से एक दी है। ज़ेरक्सेस देसाई के रूप में उनका अभिनय संयमित होते हुए भी गहरी भावनाओं से भरा पड़ा है, जो एक ऐसे व्यक्ति की कमजोरी और दृढ़ संकल्प को पेश करता है जो अपने से कहीं बड़े लक्ष्य की तलाश में है।
जे.आर.डी. टाटा के किरदार में नसीरुद्दीन शाह का अभिनय बेहद सधा हुआ और शानदार है। स्क्रीन पर सीमित समय मिलने के बावजूद, उनकी मौजूदगी इस सीरीज की भावनात्मक पिलर साबित होती है,जो प्रभावशाली, गरिमामय और शांत लेकिन जबरदस्त है।
पूरी कास्ट मिलकर कहानी को और भी ज्यादा बेहतरीन बनाती है। हर किरदार जीवंत और सार्थक लगता है- चाहे वह नमिता दुबे की ईमानदारी हो, लक्षवीर सरन की भावनात्मक गहराई हो या कावेरी सेठ की सहजता। वैभव तत्ववादी, परेश गनात्रा, अश्वथ भट्ट, विराफ पटेल, जॉय सेनगुप्ता और प्रतीक्षा लोंकर जैसे सहायक कलाकारों का अभिनय एक ऐसी दुनिया रचता है, जो बेहद वास्तविक और दिल को छू लेने वाली लगती है।
क्राफ्ट, स्केल और कहानी कहने का अंदाज-
निर्देशक रॉबी ग्रेवाल ने इस फिल्म को बहुत ही समझदारी और सटीकता के साथ बनाया है। उन्होंने कहानी को अपनी गति से आगे बढ़ने का मौका दिया है, लेकिन साथ ही कहानी पर अपनी पकड़ भी मजबूती से बनाए रखी है। फिल्म की कहानी कहीं भी जल्दबाजी में नहीं लगती, और इसके बावजूद यह दर्शकों को शुरू से अंत तक बांधे रखती है।
करण व्यास की लेखन-शैली बेहद पैनी और आत्मविश्वास से भरी है, उनके लिखे संवाद न सिर्फ स्वाभाविक लगते हैं, बल्कि बेहद असरदार भी हैं।
विजुअल्स की बात करें तो यह शो एक सिनेमाई भव्यता लिए हुए है- शानदार प्रोडक्शन डिजाइन, सोच-समझकर चुने गए लोकेशन्स और एक बैकग्राउंड स्कोर जो बड़ी ही बारीकी से कहानी के भावनात्मक पलों को उभारता है। क्लासिक म्यूजिक का इसमें इस्तेमाल कहानी पर हावी हुए बिना उसे और भी समृद्ध बनाता है।
कुल मिलाकर, इस तरह की कहानी को सपोर्ट करने के लिए हिम्मत और पक्का यकीन, दोनों की जरूरत होती है और एलमाइटी मोशन पिक्चर इस कहानी को असलियत में लाने के लिए तारीफ का हकदार है।
टी-सीरीज फिल्म्स के साथ मिलकर बनाई गई, 'मेड इन इंडिया : अ टाइटन स्टोरी' सिर्फ एक सीरीज नहीं, यह एक ऐसा अनुभव है जो आपको भारत पर बहुत ज्यादा गर्व महसूस कराता है और आपको दूरदृष्टि, लगन और राष्ट्र-निर्माण की ताकत की याद दिलाता है। जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, देशभक्ति अपने आप ही आपके अंदर उतरती जाती है।
यह अपनी तरह की एक अनोखी कहानी है जो आपको प्रेरित करती है, आपको बांधे रखती है और इसके खत्म होने के काफी समय बाद तक आपके साथ बनी रहती है।
Source: IANS
