'समर ऑफ 77' में फिर साथ आए स्वानंद किरकिरे और सुधीर मिश्रा, इमरजेंसी दौर की कहानी को संगीत से करेंगे जीवंत

मुंबई, 5 मई । मशहूर लेखक, गीतकार और संगीतकार स्वानंद किरकिरे और दिग्गज फिल्ममेकर सुधीर मिश्रा एक बार फिर आगामी राजनीतिक ड्रामा सीरीज 'समर ऑफ 77' में साथ में काम करेंगे । इस कड़ी में स्वानंद किरकिरे ने सुधीर मिश्रा के साथ काम करने के अपने अनुभव को शेयर किया।

स्वानंद किरकिरे ने सुधीर मिश्रा के साथ काम करने के अपने अनुभव को बेहद खास बताया। उन्होंने कहा, ''सुधीर मिश्रा कहानी को ईमानदारी और गहराई के साथ पेश करते हैं, जो उन्हें एक अलग पहचान देता है। ऐसे निर्देशक के साथ काम करना हमेशा सीखने वाला अनुभव होता है, क्योंकि वह हर पहलू को संवेदनशीलता से समझते हैं और उसी तरह स्क्रीन पर उतारते हैं।''

इससे पहले स्वानंद और सुधीर मिश्रा कई यादगार प्रोजेक्ट्स में साथ में कर चुके हैं। 'हजारों ख्वाहिश ऐसी' का लोकप्रिय गीत 'बावरा मन' और फिल्म 'खोया खोया चांद' उनके सफल कामों के उदाहरण हैं।

स्वानंद ने कहा, '''समर ऑफ 77' मेरा और सुधीर मिश्रा का पांचवां प्रोजेक्ट है। सुधीर की खासियत यह है कि वह अपनी फिल्मों में संगीत को पूरा स्पेस देते हैं। आज के समय में जहां कई बार संगीत सिर्फ एक औपचारिकता बनकर रह जाता है, वहीं सुधीर उसे कहानी का अहम हिस्सा बनाते हैं। जब निर्देशक संगीत पर भरोसा करते है, तो एक संगीतकार को भी कुछ नया करने की प्रेरणा मिलती है।''

'समर ऑफ 77' की कहानी की बात करें तो यह 1975 से 1977 के इमरजेंसी दौर पर आधारित है। इस सीरीज में आठ एपिसोड है, जो दर्शकों को उस दौर के युवाओं की सोच, उनके विद्रोह, उनके सपनों और उनकी पहचान की तलाश को दिखाएगी।

स्वानंद ने कहा, ''अपनी पिछली फिल्म 'बैंडवाले' के बाद मैं ऐसे प्रोजेक्ट की तलाश में था, जिसमें संगीत कहानी का हिस्सा बने। 'समर ऑफ 77' ने यह मौका दिया। इस तरह की कहानी के लिए संगीत बनाना आसान नहीं होता, क्योंकि इसमें उस दौर की आत्मा को पकड़ना जरूरी होता है। यह सीरीज उस दौर की कहानी है, जहां संगीत, कविता और अभिव्यक्ति ने लोगों की आवाज बनने में बड़ी भूमिका निभाई थी। इस सीरीज के लिए मैंने कुल छह गाने कंपोज किए हैं, जिनमें से तीन गानों को मैंने खुद अपनी आवाज भी दी है। ''

Source: IANS

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