शिल्पा शिंदे झूठा यौन उत्पीड़न मामले में सिने वर्कर्स एसोसिएशन ने सीएम फडणवीस से की सख्त कार्रवाई की मांग

मुंबई, 6 जून । 'भाभीजी घर पर हैं' फेम अभिनेत्री शिल्पा शिंदे एक बार फिर विवादों में घिर गई हैं। हाल ही में एक पॉडकास्ट में शो के निर्माता संजय कोहली के खिलाफ यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज कराने को लेकर किए खुलासे के बाद सोशल मीडिया पर उनकी कड़ी आलोचना हो रही है। इस मामले को लेकर ऑल इंडियन सिने वर्कर्स एसोसिएशन (एआईसीडब्ल्यूए) ने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए देवेंद्र फडणवीस से हस्तक्षेप करने की अपील की है।

एआईसीडब्ल्यूए ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से ‘भाभीजी घर पर हैं’ के प्रोड्यूसर संजय कोहली पर लगाए गए कथित झूठे यौन उत्पीड़न के मामले में अभिनेत्री शिल्पा शिंदे के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग करते हुए ऑफिशियल इंस्टाग्राम पर बयान जारी किया।

सिने वर्कर्स ने पोस्ट के जरिए कहा, कॉमेडियन भारती सिंह और हर्ष लिम्बाचिया के पॉडकास्ट में शिल्पा शिंदे के बयान को फिल्म और टेलीविजन इंडस्ट्री के लिए गंभीर चिंता का विषय माना जा रहा है। संगठन का कहना है कि यौन उत्पीड़न का झूठा आरोप किसी भी व्यक्ति की प्रतिष्ठा, परिवार, बच्चों, करियर और मानसिक स्वास्थ्य को स्थायी नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसे झूठे आरोप न सिर्फ आरोपी व्यक्ति की छवि हमेशा के लिए खराब कर देते हैं, बल्कि उनके पूरे परिवार को भी गंभीर परेशानी में डाल देते हैं। संगठन का मानना है कि जानबूझकर झूठे आरोप लगाने से असली पीड़ितों की विश्वसनीयता भी प्रभावित होती है। इससे सच्ची शिकायत करने वाले पीड़ितों पर भी शक किया जाने लगता है, जिससे बॉलीवुड और टेलीविजन इंडस्ट्री में असली उत्पीड़न के मामलों में न्याय मिलना मुश्किल हो जाता है।

एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि सभी महिलाएं झूठे आरोप नहीं लगातीं। फिल्म और टेलीविजन इंडस्ट्री में हजारों महिलाओं ने वाकई उत्पीड़न और शोषण का सामना किया है। वे समर्थन और न्याय की हकदार हैं। किसी एक व्यक्ति की गलत हरकत का इस्तेमाल असली पीड़ितों के अनुभवों को कमजोर करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।

एआईसीडब्ल्यूए ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से इस पूरे मामले की निष्पक्ष और पूरी जांच कराने का आग्रह किया है। अगर जांच में यह साबित हो जाता है कि जानबूझकर झूठे आरोप लगाए गए थे, तो कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। संगठन का कहना है कि निर्दोष लोगों को झूठे आरोपों से बचाना और असली पीड़ितों को न्याय दिलाना दोनों ही जरूरी है। सच्चाई, निष्पक्षता और न्याय की जीत होनी चाहिए। झूठे आरोप और असली यौन उत्पीड़न दोनों ही गंभीर मुद्दे हैं और कानून को दोनों पर सही तरीके से कार्यवाही करनी चाहिए।

Source: IANS

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