सावन मास में क्या-क्या नहीं खाना चाहिए? जानिए धार्मिक मान्यता, आयुर्वेद और स्वास्थ्य से जुड़े कारण
सावन के महीने में किन चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए? जानिए मांसाहार, प्याज-लहसुन, तला-भुना भोजन और अन्य खाद्य पदार्थों से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं, आयुर्वेदिक कारण और स्वास्थ्य संबंधी सुझाव।

देहरादून, 1 अगस्त ।सावन का महीना भगवान शिव की आराधना का सबसे पवित्र समय माना जाता है। इस पूरे महीने में बड़ी संख्या में श्रद्धालु व्रत रखते हैं, कांवड़ यात्रा करते हैं और सात्विक जीवनशैली अपनाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन में खानपान पर विशेष ध्यान देना चाहिए। कई ऐसे खाद्य पदार्थ हैं जिनका सेवन इस दौरान वर्जित माना गया है। इसके पीछे केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि आयुर्वेद और मौसम से जुड़े वैज्ञानिक कारण भी बताए जाते हैं।
सावन में क्या नहीं खाना चाहिए?
1. मांसाहार से करें परहेज
सावन में मांस, मछली और अंडे का सेवन न करने की सलाह दी जाती है। धार्मिक दृष्टि से यह महीना संयम और अहिंसा का प्रतीक माना जाता है। वहीं, बरसात के मौसम में मांस जल्दी खराब होने और संक्रमण का खतरा भी अधिक रहता है।
2. शराब और नशे से दूरी
शराब, तंबाकू और अन्य नशीले पदार्थों का सेवन सावन में वर्जित माना गया है। यह महीना मन, वचन और कर्म की शुद्धि का समय माना जाता है।
3. प्याज और लहसुन
जो लोग सावन में व्रत रखते हैं या सात्विक भोजन करते हैं, वे आमतौर पर प्याज और लहसुन का सेवन नहीं करते। इन्हें तामसिक भोजन की श्रेणी में रखा जाता है।
4. अधिक तला-भुना भोजन
बरसात के मौसम में पाचन शक्ति अपेक्षाकृत कमजोर हो सकती है। ऐसे में अधिक तला-भुना और मसालेदार भोजन गैस, अपच और पेट संबंधी समस्याओं का कारण बन सकता है।
5. बासी भोजन
सावन के दौरान हमेशा ताजा भोजन करने की सलाह दी जाती है। नमी अधिक होने के कारण भोजन जल्दी खराब हो सकता है और फूड पॉइजनिंग का खतरा बढ़ सकता है।
6. हरी पत्तेदार सब्जियां
आयुर्वेद के अनुसार, वर्षा ऋतु में हरी पत्तेदार सब्जियों में कीड़े, बैक्टीरिया और सूक्ष्म जीवों की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए कई लोग सावन में इनका सेवन सीमित कर देते हैं।
7. अधिक जंक फूड और पैकेज्ड फूड
पिज्जा, बर्गर, चिप्स, कोल्ड ड्रिंक और अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड से बचना बेहतर माना जाता है। इनकी जगह हल्का और पौष्टिक भोजन अधिक लाभदायक रहता है।
सावन में क्या खाना चाहिए?
- मौसमी फल
- दूध, दही और पनीर (यदि स्वास्थ्य के अनुसार उपयुक्त हो)
- साबूदाना, सिंघाड़े का आटा और कुट्टू का आटा (व्रत में)
- मूंग दाल की खिचड़ी
- ताजी सब्जियां (अच्छी तरह धोकर और पकाकर)
- नारियल पानी, छाछ और पर्याप्त मात्रा में पानी
जानिए आयुर्वेद क्या कहता है?
आयुर्वेद के अनुसार वर्षा ऋतु में शरीर की पाचन अग्नि कमजोर हो जाती है। इसलिए हल्का, ताजा और आसानी से पचने वाला भोजन करने की सलाह दी जाती है। अत्यधिक तैलीय, भारी और बासी भोजन से बचने से पाचन तंत्र स्वस्थ रहता है।
धार्मिक महत्व
सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित है। इस दौरान सात्विक भोजन, संयम, व्रत, जप और पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इस महीने शुद्ध आहार और अच्छे आचरण से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।
नोट: यदि आपको किसी प्रकार की बीमारी है या आप गर्भवती हैं, तो व्रत या खानपान में बड़ा बदलाव करने से पहले डॉक्टर या योग्य आहार विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।
Source: The News Com Network

