रोजाना 5 मिनट करें सेतुबंधासन, दूर होगी कब्ज की समस्या और मजबूत होगी रीढ़ की हड्डी
आजकल की व्यस्त दिनचर्या और दफ्तर में घंटों में बैठे रहने से कमर दर्द, तनाव और थकान होना आम समस्या बन गई है।
नई दिल्ली, 13 अक्टूबर । आजकल की व्यस्त दिनचर्या और दफ्तर में घंटों में बैठे रहने से कमर दर्द, तनाव और थकान होना आम समस्या बन गई है। ऐसे में सेतुबंधासन को अपनी दिनचर्या में शामिल करने से शरीर को कई तरह के लाभ मिल सकते हैं। इसके नियमित अभ्यास करने से रीढ़ की हड्डी लचीली रहती है और शरीर में रक्त संचार बेहतर होता है।
सेतुबंधासन दो शब्दों से मिलकर बना है - 'सेतु' मतलब पुल और 'बंध' मतलब बांधना। इस आसन को करने के दौरान शरीर की आकृति पुल जैसी बनती है, इसलिए इसे सेतुबंधासन या ब्रिज पोज कहा जाता है। यह आसन दिखने में जितना आसान लगता है, फायदे में भी उतने ही कारगर होते हैं। यह न सिर्फ रीढ़ की हड्डी को लचीला और मजबूत बनाता है बल्कि दिल को स्वस्थ रखने, पाचन सुधारने और मन को शांत रखने में भी मदद करता है।
आयुष मंत्रालय के अनुसार, सेतुबंधासन पीठ के बल लेटकर की जाने वाली मुद्राओं में से एक मुख्य आसन है। यह आसन शारीरिक मजबूती और मानसिक शांति दोनों के लिए बेहद प्रभावी माना गया है। रोजाना इसका अभ्यास करने से रीढ़ की हड्डी लचीली बनती है और शरीर में रक्त संचार बेहतर होता है।
सेतुबंधासन पेट के अंगों में खिंचाव लाता है, जिससे पाचन क्रिया दुरुस्त होती है और कब्ज की समस्या से राहत मिलती है। साथ ही, यह रीढ़ की हड्डी के लिए भी लाभकारी है। इस आसन में जब आप पीठ को ऊपर की तरफ उठाते हैं, तो रीढ़ की हड्डी में धीरे-धीरे खिंचाव आता है।
रोजाना अभ्यास करने से रीढ़ की हड्डी लचीली और मजबूत बनती है। इससे कमर दर्द, पीठ दर्द और गर्दन के अकड़न में बहुत आराम मिलता है। जो लोग घंटों बैठकर काम करते हैं, उनके लिए यह आसन वरदान जैसा है। सेतुबंधासन महिलाओं में हार्मोन्स के संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है। यह थायरॉयड ग्रंथि और पेल्विक क्षेत्र में रक्त संचार को बेहतर करता है। इससे पीरियड्स से जुड़ी समस्याओं, मूड स्विंग्स और मेनोपॉज के दौरान होने वाली परेशानियों में राहत मिलती है। साथ ही, यह तनाव को कम करके मन को शांत भी रखता है।
Source: IANS