PM 2.5 प्रदूषण से कैसे बचें? सही मास्क चुनने और बच्चों के लिए खरीदने

नई दिल्ली, 25 अक्टूबर। सर्दियों की शुरुआत के साथ ही देश के कई शहरों में वायु प्रदूषण और स्मॉग की समस्या बढ़ने लगती है। वाहनों से निकलने वाला धुआं, औद्योगिक उत्सर्जन, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल और पराली जलाने जैसी घटनाएं हवा की गुणवत्ता को प्रभावित करती हैं। प्रदूषण बढ़ने पर आंखों में जलन, गले में खराश और सांस लेने में परेशानी जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। ऐसे में खुद को और परिवार को प्रदूषित हवा से बचाने के लिए मास्क का इस्तेमाल एक उपयोगी उपाय हो सकता है। हालांकि, हर मास्क प्रदूषण से बचाव में समान रूप से प्रभावी नहीं होता।

मास्क खरीदने से पहले यह समझना जरूरी है कि हवा में मौजूद प्रदूषक कण किस तरह नुकसान पहुंचाते हैं और उनसे बचने के लिए किस तरह का मास्क चुनना चाहिए।

PM 10 और PM 2.5 में क्या है अंतर?

हवा में मौजूद ठोस कणों और तरल बूंदों के मिश्रण को पार्टिकुलेट मैटर (PM) कहा जाता है। इनके आकार के आधार पर इन्हें अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जाता है। PM 10 और PM 2.5 इनमें प्रमुख हैं।

PM 10: इन कणों का व्यास 10 माइक्रोमीटर या उससे कम होता है। धूल, परागकण और अन्य मोटे प्रदूषक कण इस श्रेणी में आते हैं। ये नाक और गले में जलन, खांसी तथा एलर्जी जैसी समस्याएं पैदा कर सकते हैं।

PM 2.5: इन कणों का व्यास 2.5 माइक्रोमीटर या उससे कम होता है। आकार में बेहद छोटे होने के कारण ये सांस के साथ फेफड़ों के गहरे हिस्सों तक पहुंच सकते हैं। इनमें से कुछ कण रक्तप्रवाह तक भी पहुंच सकते हैं। लंबे समय तक इनके संपर्क में रहने से अस्थमा और अन्य श्वसन संबंधी समस्याओं के साथ हृदय और फेफड़ों की बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है।

प्रदूषण से बचने के लिए कौन-सा मास्क चुनें?

जब हवा में PM 2.5 का स्तर बढ़ जाता है, तब सही मास्क का चुनाव महत्वपूर्ण हो जाता है। मास्क की फिल्टर क्षमता के साथ उसका चेहरे पर सही तरीके से फिट होना भी जरूरी है।

1. सर्जिकल मास्क: बारीक प्रदूषक कणों से सीमित सुरक्षा

अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाला तीन परतों वाला सर्जिकल मास्क छींक और खांसी से निकलने वाली बूंदों को रोकने में मदद करता है। यह कुछ बड़े कणों से भी सुरक्षा दे सकता है, लेकिन आम तौर पर इसके किनारों पर खाली जगह रह जाती है। इस वजह से यह PM 2.5 जैसे बारीक कणों से बचाव के लिए अच्छी तरह फिट होने वाले रेस्पिरेटर मास्क जितना प्रभावी नहीं होता।

इसलिए अधिक प्रदूषण वाले वातावरण में केवल सर्जिकल मास्क पर निर्भर रहना उचित नहीं है।

2. N95 मास्क: PM 2.5 से बचाव का व्यावहारिक विकल्प

वायु प्रदूषण से बचाव के लिए सही तरीके से फिट होने वाला प्रमाणित N95 रेस्पिरेटर एक उपयोगी विकल्प है। निर्धारित परीक्षण परिस्थितियों में यह हवा में मौजूद कम से कम 95 प्रतिशत परीक्षण कणों को फिल्टर करने के लिए बनाया जाता है।

यहां 'N' का अर्थ है कि मास्क तेल आधारित कणों से सुरक्षा के लिए नहीं बनाया गया है, जबकि '95' इसकी निर्धारित फिल्टर दक्षता को दर्शाता है। इसका उपयोग करते समय यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि मास्क नाक और मुंह को अच्छी तरह ढके और किनारों से हवा का रिसाव कम से कम हो।

ध्यान रखें कि केवल N95 लिखा होना पर्याप्त नहीं है। मास्क की प्रमाणिकता, सही आकार और चेहरे पर उसकी फिटिंग भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

3. N99 और N100 मास्क: क्या ये N95 से बेहतर हैं?

N99 और N100 श्रेणी के रेस्पिरेटर निर्धारित परीक्षण परिस्थितियों में क्रमशः कम से कम 99 प्रतिशत और 99.97 प्रतिशत कणों को फिल्टर करने के लिए बनाए जाते हैं। हालांकि, अधिक फिल्टर दक्षता का मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति के लिए ये मास्क N95 से बेहतर विकल्प होंगे।

इन मास्क में सांस लेने के लिए अधिक प्रतिरोध महसूस हो सकता है। इसलिए मास्क चुनते समय अपने काम, आराम, सही फिटिंग और उपयोग की अवधि को ध्यान में रखना चाहिए। अत्यधिक प्रदूषण के दौरान सही फिटिंग वाला प्रमाणित रेस्पिरेटर चुनना ज्यादा महत्वपूर्ण है।

मास्क कितने समय तक इस्तेमाल करना चाहिए?

मास्क की उपयोग अवधि उसके प्रकार, निर्माता के निर्देशों, इस्तेमाल की परिस्थितियों और उसकी स्थिति पर निर्भर करती है। हर मास्क के लिए एक ही समय सीमा निर्धारित नहीं की जा सकती।

  • सर्जिकल मास्क: इसे निर्माता के निर्देशों के अनुसार इस्तेमाल करें। गीला, गंदा या क्षतिग्रस्त होने पर इसे तुरंत बदल दें। डिस्पोजेबल मास्क को धोकर दोबारा इस्तेमाल न करें।

  • N95 और अन्य रेस्पिरेटर: इन्हें पानी से न धोएं और न ही सामान्य तरीके से सैनिटाइज करें। ऐसा करने से फिल्टर की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। दोबारा इस्तेमाल की अनुमति और अवधि के लिए निर्माता के निर्देशों का पालन करें।

  • मास्क कब बदलें: मास्क गीला, गंदा, फटा या क्षतिग्रस्त हो जाए, उसकी फिटिंग खराब हो जाए अथवा सांस लेने में असामान्य कठिनाई होने लगे, तो उसे बदलें।

कुछ परिस्थितियों में रेस्पिरेटर का दोबारा इस्तेमाल संभव हो सकता है, लेकिन सभी N95 मास्क के लिए 40 से 50 घंटे इस्तेमाल करने का नियम सही नहीं है। इसलिए तय घंटों के बजाय निर्माता के निर्देशों और मास्क की वास्तविक स्थिति को प्राथमिकता दें।

बच्चों के लिए मास्क खरीदते समय किन बातों का रखें ध्यान?

बच्चों को वायु प्रदूषण से बचाना विशेष रूप से जरूरी है, क्योंकि उनके फेफड़े अभी विकसित हो रहे होते हैं। उनकी सांस लेने की गति भी वयस्कों की तुलना में अधिक हो सकती है। ऐसे में प्रदूषित हवा के संपर्क को कम करने के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।

बच्चों के लिए मास्क चुनते समय इन बातों पर ध्यान दें:

  1. सही आकार चुनें: बच्चों के चेहरे छोटे होते हैं, इसलिए वयस्कों के लिए बना N95 मास्क उनके चेहरे पर ठीक से फिट नहीं हो सकता। बच्चे की उम्र और चेहरे के आकार के अनुरूप मास्क चुनें।

  2. फिटिंग की जांच करें: मास्क नाक और मुंह को पूरी तरह ढके और ठुड्डी तक सही तरीके से बैठे। किनारों पर खाली जगह रहने से प्रदूषित हवा अंदर जा सकती है।

  3. प्रमाणिकता देखें: ऐसा मास्क चुनें जिसकी फिल्टर क्षमता और प्रमाणन की जानकारी स्पष्ट हो। केवल 'किड्स' या 'N95' लिखा होना उसकी गुणवत्ता का पर्याप्त प्रमाण नहीं है।

  4. बच्चे की सहजता पर ध्यान दें: मास्क पहनने पर बच्चे को सांस लेने में परेशानी, घबराहट या असहजता हो तो उसे नजरअंदाज न करें।

  5. छोटे बच्चों के लिए विशेष सावधानी: दो साल से कम उम्र के बच्चों को मास्क नहीं पहनाना चाहिए, क्योंकि इससे सांस लेने में परेशानी और दम घुटने का खतरा हो सकता है।

बच्चों के लिए उपयुक्त मास्क उपलब्ध न हो या वह चेहरे पर ठीक से फिट न बैठे, तो केवल मास्क के भरोसे उन्हें प्रदूषण के संपर्क में न रखें।

प्रदूषण से बचने के लिए मास्क के अलावा क्या करें?

मास्क के साथ कुछ अन्य सावधानियां अपनाकर भी प्रदूषित हवा के संपर्क को कम किया जा सकता है।

  • AQI यानी वायु गुणवत्ता सूचकांक की नियमित जानकारी लें और प्रदूषण का स्तर अधिक होने पर बाहर निकलने का समय सीमित रखें।

  • खराब वायु गुणवत्ता वाले दिनों में बच्चों की आउटडोर गतिविधियां और खेलकूद कम करें।

  • व्यस्त सड़कों, निर्माण स्थलों और धुएं वाले क्षेत्रों में अनावश्यक रूप से जाने से बचें।

  • घर के अंदर भी प्रदूषण का स्तर बढ़ा हो, तो परिस्थितियों के अनुसार उपयुक्त एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल किया जा सकता है।

  • अस्थमा, हृदय रोग या सांस संबंधी समस्या से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

निष्कर्ष: बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच सही मास्क चुनना जरूरी है, लेकिन केवल मास्क पहनना ही पर्याप्त नहीं है। प्रमाणित N95 रेस्पिरेटर, उसकी सही फिटिंग और प्रदूषित हवा के संपर्क को कम करने जैसे उपाय मिलकर बेहतर सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं। बच्चों के मामले में सही आकार का मास्क चुनने के साथ-साथ उन्हें अधिक प्रदूषण वाले वातावरण से दूर रखना भी बेहद महत्वपूर्ण है।

Source: IANS

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