अर्धउष्ट्रासन अपनाएं, पीठ-गर्दन को मजबूत बनाएं; बेहतर रक्त संचार के साथ मिलेंगे कई स्वास्थ्य लाभ
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों के लिए अपने स्वास्थ्य पर नियमित रूप से समय देना चुनौती बनता जा रहा है। इसका असर धीरे-धीरे शरीर पर दिखाई देने लगता है और कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है।

नई दिल्ली, 26 जुलाई । आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों के लिए अपने स्वास्थ्य पर नियमित रूप से समय देना चुनौती बनता जा रहा है। इसका असर धीरे-धीरे शरीर पर दिखाई देने लगता है और कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रोजाना कुछ समय योग के लिए निकाला जाए, तो कई बीमारियों के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है। जैसा कि कहा जाता है, "इलाज से बेहतर बचाव है।"
शरीर में रक्त संचार कम होने पर अंगों तक ऑक्सीजन और आवश्यक पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंच पाते। इसके कारण हाथ-पैर ठंडे पड़ना, सुन्नपन या झुनझुनी महसूस होना तथा चोट या घाव भरने में अधिक समय लगने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
वहीं, लंबे समय तक एक ही जगह बैठकर काम करने वाले लोगों में पीठ और गर्दन की मांसपेशियों में दर्द और कमजोरी की समस्या भी आम होती जा रही है। इसकी प्रमुख वजह गलत शारीरिक मुद्रा (बैड पोश्चर), लंबे समय तक लगातार बैठे रहना और नियमित व्यायाम का अभाव माना जाता है। इन कारणों से मांसपेशियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे वे धीरे-धीरे कमजोर हो सकती हैं।
इसी क्रम में आयुष मंत्रालय ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लोगों को अर्धउष्ट्रासन करने की सलाह दी है। मंत्रालय के अनुसार, यह हल्का बैकबेंड योगासन शरीर को मजबूत बनाने, लचीलापन बढ़ाने और समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में सहायक माना जाता है।
आयुष मंत्रालय के मुताबिक, अर्धउष्ट्रासन के नियमित अभ्यास से पीठ और गर्दन की मांसपेशियों को मजबूती मिल सकती है। मंत्रालय का कहना है कि यह कब्ज और पीठ दर्द से राहत दिलाने में भी सहायक हो सकता है। इसके अलावा, यह सिर और हृदय क्षेत्र में रक्त संचार बेहतर बनाने में मदद कर सकता है, जिससे शरीर को ऑक्सीजन और आवश्यक पोषक तत्वों की आपूर्ति बेहतर ढंग से हो सकती है। मंत्रालय के अनुसार, इस योगासन का नियमित अभ्यास स्वस्थ और सक्रिय जीवनशैली अपनाने की दिशा में एक प्रभावी कदम हो सकता है।
Source: IANS

