नवदुर्गा से जुड़े 9 आयुर्वेदिक पौधे: सेहत के लिए किसी वरदान से कम नहीं

नई दिल्ली, 21 मार्च। नवरात्र के नौ दिनों में पूजी जाने वाली नवदुर्गा केवल आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि वे हमारे जीवन में स्वास्थ्य और संतुलन का भी संदेश देती हैं। इन नौ देवियों का संबंध नौ आयुर्वेदिक औषधीय पौधों से जोड़ा गया है, जो तन और मन दोनों के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं। 

पहले दिन पूजी जाने वाली मां शैलपुत्री का संबंध हरड़ से माना जाता है, जो पाचन तंत्र को मजबूत करने और शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करती है। दूसरे दिन पूजी जाने वाली मां ब्रह्मचारिणी का संबंध ब्राह्मी से माना जाता है। यह पौधा दिमाग को तेज करने और तनाव कम करने में बेहद उपयोगी है। तीसरे दिन मां चंद्रघंटा को पूजा जाता है। इनसे जुड़ा चंद्रसूर पौधा पेट को ठंडक देता है और गैस, कब्ज जैसी समस्याओं से राहत दिलाता है।

चौथे दिन मां कुष्मांडा की पूजा होती है। इनका संबंध कुम्हड़ा (पेठा) से माना जाता है, जो शरीर को ठंडक देता है और ऊर्जा प्रदान करता है। पांचवें दिन पूजी जाने वाली स्कंदमाता का संबंध अलसी से जुड़ा है, जो शरीर में वात-पित्त को संतुलित रखती है और दिल की सेहत के लिए भी फायदेमंद मानी जाती है। छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है, जिनका संबंध मोइया से है। यह औषधीय पौधा कफ और पित्त से जुड़ी समस्याओं में राहत देता है।

सातवें दिन पूजी जाने वाली मां कालरात्रि का संबंध नागदौन से है, जो अपने शक्तिशाली औषधीय गुणों के लिए जाना जाता है और कई तरह के संक्रमण से बचाने में मदद करता है। आठवें दिन महागौरी की पूजा की जाती है, जिनका संबंध तुलसी के पौधे से है। तुलसी को आयुर्वेद में अमृत समान माना गया है, जो इम्यूनिटी बढ़ाने और बीमारियों से रक्षा करने में अहम भूमिका निभाती है। वहीं नौवें दिन पूजी जाने वाली मां सिद्धिदात्री का संबंध शतावरी से है, जो शरीर की कमजोरी को दूर कर ताकत और ऊर्जा प्रदान करती है।

Source: IANS

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