New Delhi - Page 534
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दिल्ली यूनिवर्सिटी के हंसराज कॉलेज ने सोशल मीडिया पर संस्थान को बदनाम करने और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने के आरोपों में करीब 30 छात्रों को सस्पेंड कर दिया है। इनमें छात्र संघ के चार पदाधिकारी भी शामिल हैं।
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आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल की जस्टिस स्वर्णमाला के खिलाफ टिप्पणी पर राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है। दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सजा के डर से केजरीवाल राजनीतिक नौटंकी कर रहे हैं, लेकिन भारतीय लोकतंत्र में ऐसा नहीं होता है।
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दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी ने अरविंद केजरीवाल द्वारा जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को लिखे पत्र का समर्थन किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अरविंद केजरीवाल के वीडियो को शेयर किया है, जिसमें वे जस्टिस स्वर्णकांता को लिखे पत्र के बारे में बता रहे हैं।
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भारत-न्यूजीलैंड के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) पर सोमवार को साइन होंगे। न्यूजीलैंड की सरकार इसे एक पीढ़ी में एक बार आने वाला मौका बता रही है।
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केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सोमवार को आम आदमी पार्टी (आप) से भाजपा में शामिल हुए 7 राज्यसभा सदस्यों का स्वागत किया। रिजिजू ने कहा कि उन सांसदों ने सदन ने न कभी अपशब्दों का प्रयोग किया न अनुशासनहीनता की।
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देश की संसदीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव सामने आया है। राज्यसभा सचिवालय द्वारा सोमवार को जारी की गई जानकारी में आम आदमी पार्टी के सात पूर्व नेताओं के नाम आधिकारिक तौर पर भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसदों के रूप में शामिल दिखाई दिए हैं।
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राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है। इस फैसले के बाद से लगातार उन पर कई सवाल उठ रहे थे।
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भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर सोमवार को मुहर लगने वाली है। भारत-न्यूजीलैंड एफटीए को लेकर न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने सोशल मीडिया पर अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि भारत और न्यूजीलैंड के बीच एफटीए डील को लेकर दशकों से लोगों ने कहा कि यह नहीं होगा, लेकिन आज यह होने वाला है।
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दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता को एक पत्र लिखकर बड़ा फैसला जाहिर किया है। उन्होंने कहा कि उन्हें अब जस्टिस स्वर्णकांता से न्याय मिलने की उम्मीद नहीं रही, इसलिए वे न तो खुद अदालत में पेश होंगे और न ही अपने वकील को भेजेंगे।
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कई बार हमारा शरीर छोटे-छोटे संकेत देता है, लेकिन हम उन्हें आम थकान या मौसम का असर समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन यही लापरवाही आगे चलकर बड़ी परेशानी बन सकती है।
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