सीबीआई ने उत्तराखंड एलयूसीसी चिट फंड घोटाले में दो मुख्य आरोपियों को किया गिरफ्तार

नई दिल्ली, 2 जून । उत्तराखंड एलयूसीसी चिट फंड घोटाला मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने मुंबई से दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनकी गिरफ्तारी जांच दल के निरंतर और गहन प्रयासों के बाद हुई, जिसमें भारी मात्रा में वित्तीय रिकॉर्ड का विश्लेषण, बैंक लेनदेन की जांच, मौखिक साक्ष्य का संग्रह और देश के विभिन्न राज्यों में व्यापक क्षेत्र जांच शामिल थी।

उत्तराखंड के नैनीताल स्थित हाई कोर्ट ने 17 अक्टूबर 2025 को पारित आदेश के अनुपालन में सीबीआई, एसीबी, देहरादून ने 26 नवंबर 2025 को मेसर्स लोनी अर्बन मल्टी स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट को-ऑपरेटिव सोसाइटी (एलयूसीसी) के विभिन्न पदाधिकारियों और अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया था।

यह मामला उत्तराखंड राज्य के कई जिलों में बड़ी संख्या में निवेशकों को प्रभावित करने वाले एलयूसीसी द्वारा सार्वजनिक जमा की अवैध वसूली, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, आपराधिक साजिश, अनियमित जमा योजनाओं के संचालन और धन के दुरुपयोग आदि के आरोपों से संबंधित है।

अब तक की जांच से उत्तराखंड में जनता के साथ हुए अभूतपूर्व उत्पीड़न का खुलासा हुआ है, जिसमें लगभग एक लाख से अधिक निवेशकों को एलयूसीसी की विभिन्न अनियमित जमा योजनाओं में निवेश करने के लिए लुभाया गया था। इन जमाकर्ताओं द्वारा किए गए कुल निवेश/जमा की राशि लगभग 800 करोड़ रुपए होने का अनुमान है।

जांच से पता चला है कि मुंबई से गिरफ्तार किए गए दोनों व्यक्ति मुख्य आरोपियों में शामिल हैं और अन्य आरोपियों के साथ मिलकर एलयूसीसी द्वारा संचालित विभिन्न अनियमित जमा योजनाओं के तहत जमाकर्ताओं से एकत्रित धन के संग्रह, प्रबंधन, हेराफेरी और गबन में सक्रिय और महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्य लाखों निवेशकों से जुटाए गए धन की हेराफेरी, प्रबंधन और उपयोग से संबंधित एक बड़ी साजिश में उनकी संलिप्तता को दर्शाते हैं। रिमांड प्राप्त करने के बाद दोनों आरोपियों को देहरादून स्थित न्यायालय के समक्ष पेश किया जाएगा।

सीबीआई ने इससे पहले 12 और 13 मई 2026 को 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया था, जिनमें उत्तराखंड में एलयूसीसी के 3 वरिष्ठ सहकारी प्रवर्तक शामिल थे, जो उत्तराखंड में जनता से सक्रिय रूप से जमा राशि एकत्रित कर रहे थे और नकद जमा शाखाओं का प्रबंधन कर रहे थे। ये सभी 5 आरोपी वर्तमान में देहरादून की सुधोवाला जेल में हैं।

ये गिरफ्तारियां सीबीआई द्वारा सार्वजनिक जमा राशि के अवैध संग्रहण और गबन के पीछे की बड़ी साजिश का पर्दाफाश करने की जांच में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। सीबीआई ने आरोपियों द्वारा अपराध की आय से अर्जित कई अचल संपत्तियों का विवरण भी प्राप्त किया है और यह विवरण बीयूडीएस अधिनियम के तहत सक्षम प्राधिकारी अर्थात उत्तराखंड सरकार के वित्त सचिव के साथ साझा किया गया है।

Source: IANS

अन्य समाचार

Advertisement

Advertisement

Advertisement

Get Newsletter

Advertisement