पश्चिम बंगाल: भरतपुर में बदले समीकरणों के बीच टीएमसी की जीत, भाजपा को शिकस्त
पश्चिम बंगाल की भरतपुर सीट से टीएमसी के मुस्तफिजुर रहमान (सुमन) ने जीत दर्ज की। उन्होंने भाजपा की प्रत्याशी अनामिका घोष को 30,753 मतों से हराया है।
कोलकाता, 4 मई । पश्चिम बंगाल की भरतपुर सीट से टीएमसी के मुस्तफिजुर रहमान (सुमन) ने जीत दर्ज की। उन्होंने भाजपा की प्रत्याशी अनामिका घोष को 30,753 मतों से हराया है। चुनावी नतीजों के साथ ही मुर्शिदाबाद जिले की यह अहम सीट एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है, जहां हाल के वर्षों में तेजी से बदलते समीकरण साफ दिखाई देते हैं।
इस सीट पर सबसे चर्चित चेहरों में से एक रहे हुमायूं कबीर, जिन्होंने पुलिस कमिश्नर के पद से इस्तीफा देकर राजनीति में कदम रखा था। वे ममता बनर्जी सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं और हाल के समय में बाबरी मस्जिद के पुनर्निर्माण को लेकर दिए गए बयान के कारण सुर्खियों में रहे।
इस बयान के बाद तृणमूल कांग्रेस से उनका निलंबन हुआ; उन्होंने आम जनता उन्नयन पार्टी (एयूजेपी) का गठन किया। साथ ही, इस बार अपनी इस सीट को छोड़कर उन्होंने रेजीनगर और नौदा से चुनाव लड़ा।
मुर्शिदाबाद की भरतपुर एक सामान्य सीट है। यह बहरामपुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है। इसमें भरतपुर-2 ब्लॉक और भरतपुर-1 ब्लॉक की कुछ ग्राम पंचायतें शामिल हैं। यह क्षेत्र मुख्य रूप से ग्रामीण है।
इस सीट का राजनीतिक इतिहास काफी समृद्ध रहा है। 1951 से 2021 तक के विधानसभा चुनावों के नतीजों पर अगर हम नजर डालें तो शुरुआती दशकों में रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) का दबदबा रहा, जिसने नौ बार जीत दर्ज की। कांग्रेस ने भी छह बार जीत हासिल की, जबकि तृणमूल कांग्रेस और सीपीआई(एम) को एक-एक बार सफलता मिली। आरएसपी के ईद मोहम्मद ने 1991 से 2011 तक लगातार पांच बार इस सीट का प्रतिनिधित्व किया।
2011 के बाद इस सीट की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला। आरएसपी की पकड़ कमजोर हुई और 2016 में कांग्रेस ने जीत दर्ज की। इसके बाद 2021 में तृणमूल कांग्रेस ने पहली बार यहां से जीत हासिल की, जब हुमायूं कबीर ने अपने प्रतिद्वंद्वी को बड़े अंतर से हराया। हालांकि, इस बार के चुनाव से पहले टीएमसी ने हुमायूं कबीर को निष्कासित कर दिया। लेकिन, पार्टी की मजबूत पकड़ के कारण यह सीट एक बार फिर टीएमसी के खाते में गई।
डेमोग्राफिक दृष्टि से भरतपुर एक मुस्लिम बहुल क्षेत्र है, जहां वर्तमान में करीब 57.90 प्रतिशत मतदाता मुस्लिम हैं, जबकि अनुसूचित जाति के मतदाता लगभग 16.44 प्रतिशत हैं। हाल के वर्षों में मतदाताओं की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है, जो इस क्षेत्र के बदलते सामाजिक समीकरणों को दर्शाती है। वहीं, भौगोलिक रूप से भरतपुर बहरामपुर, कृष्णानगर और कोलकाता जैसे शहरों से सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है, जबकि रेल संपर्क पास के स्टेशनों के जरिए उपलब्ध है।
लोकसभा चुनावों के आंकड़े भी यहां के बदलते रुझान को दिखाते हैं। जहां पहले कांग्रेस और आरएसपी का दबदबा था, वहीं हाल के वर्षों में तृणमूल कांग्रेस ने बढ़त बनाई है और लगातार मजबूत प्रदर्शन किया है।
Source: IANS