केंद्र सरकार ने जनगणना 2027 के दूसरे चरण के संचालन के लिए अधिसूचना

नई दिल्ली, 4 अगस्त । केंद्र सरकार ने जनगणना 2027 के दूसरे चरण Population Enumeration (PE) के संचालन के लिए अधिसूचना जारी कर दी है। यह अधिसूचना उन बर्फबारी वाले गैर-समकालिक (Snow-bound Non-Synchronous) क्षेत्रों के लिए जारी की गई है, जहां मौसम संबंधी परिस्थितियों के कारण सामान्य समय पर जनगणना कराना संभव नहीं होता।

अधिसूचना के अनुसार, केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख, जम्मू-कश्मीर के बर्फबारी वाले गैर-समकालिक क्षेत्रों तथा हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के चयनित बर्फबारी वाले क्षेत्रों में 1 सितंबर से 30 सितंबर 2026 तक Population Enumeration (PE) का कार्य किया जाएगा। इस दौरान जनगणना अधिकारी घर-घर जाकर प्रत्येक परिवार और उसके सदस्यों से संबंधित आवश्यक जानकारी एकत्र करेंगे।

1 से 5 अक्टूबर तक होगा रिवीजन राउंड

सरकार ने बताया कि Population Enumeration का कार्य पूरा होने के बाद 1 अक्टूबर से 5 अक्टूबर 2026 तक Revision Round आयोजित किया जाएगा। इस दौरान यदि किसी परिवार या व्यक्ति का विवरण छूट जाता है या उसमें कोई त्रुटि पाई जाती है, तो उसे संशोधित और अपडेट किया जाएगा, ताकि अंतिम जनगणना आंकड़े अधिक सटीक और विश्वसनीय हों।

1 अक्टूबर 2026 होगी संदर्भ तिथि

अधिसूचना के अनुसार, इन अधिसूचित क्षेत्रों के लिए जनगणना की संदर्भ तिथि (Reference Date) 1 अक्टूबर 2026 को रात 12:00 बजे (00:00 Hours) निर्धारित की गई है। इसी समय को आधार मानकर संबंधित क्षेत्रों की जनसंख्या और अन्य जनसांख्यिकीय आंकड़े दर्ज किए जाएंगे।

17 अगस्त से मिलेगी Self-Enumeration की सुविधा

सरकार ने नागरिकों की सुविधा के लिए Self-Enumeration की व्यवस्था भी उपलब्ध कराई है। अधिसूचित क्षेत्रों के निवासी 17 अगस्त से 31 अगस्त 2026 के बीच स्वयं ऑनलाइन माध्यम से अपनी और अपने परिवार की जानकारी दर्ज कर सकेंगे। यह प्रक्रिया घर-घर जाकर होने वाली Population Enumeration शुरू होने से पहले पूरी की जा सकेगी।

डिजिटल और सटीक जनगणना पर जोर

सरकार का उद्देश्य जनगणना प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, डिजिटल और त्रुटिरहित बनाना है। Self-Enumeration जैसी सुविधा से नागरिकों की भागीदारी बढ़ेगी, वहीं फील्ड अधिकारियों के लिए भी डेटा का सत्यापन और संकलन अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा। जनगणना 2027 के आंकड़े भविष्य की विकास योजनाओं, संसाधनों के आवंटन, सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों और नीति निर्माण के लिए महत्वपूर्ण आधार साबित होंगे।

Source: The News Com Network

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