सुप्रीम कोर्ट का आदेश, नई कारों के लिए 4 साल और दो-पहिया गाड़ियों के

नई दिल्ली, 4 अगस्त । सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आदेश दिया कि नई गाड़ियों के लिए जरूरी थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस की अवधि एक साल बढ़ाई जाए। कोर्ट ने कहा कि अब नई कार खरीदने पर चार साल और नए दो-पहिया वाहन खरीदने पर छह साल का इंश्योरेंस कवर लेना जरूरी होगा। यह कदम मोटर व्हीकल एक्ट (एमवीए) के नियमों का पालन बेहतर बनाने और सड़क सुरक्षा को बढ़ाने के मकसद से उठाया गया है।

जस्टिस संजय करोल और जस्टिस पीके मिश्रा की बेंच ने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड की अपील पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश जारी किया। बेंच ने कहा कि नई कारों के लिए तीन साल और नए दोपहिया वाहनों के लिए पांच साल के थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस के पहले के आदेश के बावजूद, बड़ी संख्या में वाहन बिना वैध इंश्योरेंस के सड़कों पर चल रहे हैं।

जस्टिस करोल की अगुवाई वाली बेंच ने कहा, "हमने देखा है कि उस निर्देश के आठ साल बाद भी बड़ी संख्या में वाहन बिना इंश्योरेंस के हैं। हालांकि, आईआरडीए और जीआईसी ने सिफारिश की है कि इस अवधि को न बढ़ाया जाए, लेकिन हमारी राय है कि सड़क सुरक्षा के हित में अवधि को एक साल और बढ़ाया जाना चाहिए।"

बेंच ने आगे कहा, "यह निर्देश दिया जाता है कि अब से नई कारों के लिए चार साल और नए दोपहिया वाहनों के लिए छह साल का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस खरीदना अनिवार्य होगा। आईआरडीए को तुरंत जरूरी निर्देश जारी करने चाहिए।"

बेंच मोटर वाहन अधिनियम की धारा 146 के पालन न होने से जुड़े मुद्दों पर सुनवाई कर रही थी। इस धारा के तहत सभी वाहनों के लिए थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस अनिवार्य है। इसके साथ ही, बेंच एक ऐसी समान मोटर वाहन इंश्योरेंस पॉलिसी संरचना की आवश्यकता पर भी विचार कर रही थी, जिसमें थर्ड-पार्टी जोखिमों के अलावा वाहन में सवार लोगों को भी कवर किया जाए।

अपने आदेश में, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भारतीय सड़कों पर चलने वाले लगभग 56 प्रतिशत वाहन बिना इंश्योरेंस के हैं, जिससे एमवीए के तहत अनिवार्य इंश्योरेंस का मकसद ही खत्म हो जाता है।

फैसले में कहा गया, "यह जानकर हैरानी होती है कि देश की सड़कों पर चलने वाले करीब 56 फीसदी वाहन बिना इंश्योरेंस के हैं।" साथ ही यह भी कहा गया कि सड़क दुर्घटनाओं के शिकार लोगों और उनके परिवारों को अक्सर मुआवजा पाने के लिए लंबे समय तक कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ती है।

सुनवाई के दौरान, आईआरडीएआई और जनरल इंश्योरेंस काउंसिल ने सुझाव दिया था कि अनिवार्य इंश्योरेंस की अवधि बढ़ाने से व्यापक जनहित नहीं सधेगा। उनका तर्क था कि लंबी अवधि की पॉलिसी से प्रीमियम बढ़ जाएगा और इससे बिना इंश्योरेंस वाले वाहनों की संख्या में कोई खास कमी नहीं आई है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सड़क सुरक्षा के व्यापक हित में इंश्योरेंस की अवधि बढ़ाना जरूरी था।

एक अहम निर्देश में, सुप्रीम कोर्ट ने निजी वाहनों के लिए चार-स्तरीय इंश्योरेंस संरचना को मंजूरी दी। इसमें अनिवार्य थर्ड-पार्टी पॉलिसी, वाहन में सवार लोगों या पीछे बैठने वालों (पिलियन राइडर्स) के लिए वैकल्पिक कानूनी दायित्व कवर, मालिक-चालक और यात्रियों के लिए वैकल्पिक व्यक्तिगत दुर्घटना कवर, और वैकल्पिक 'ओन-डैमेज' (खुद के वाहन को हुए नुकसान का) कवर शामिल हैं।

इसमें निर्देश दिया गया कि मोटर इंश्योरेंस खरीदने वाले हर ग्राहक को, चाहे वह ऑफलाइन हो या ऑनलाइन, एक जरूरी 'कस्टमर ऑप्शन फॉर्म' दिया जाए, जिससे वे चेकबॉक्स के जरिए अतिरिक्त कवर चुन सकें।

Source: IANS

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