बस्तर में पीएम मोदी बोले- 'कई राजनीतिक दलों और संगठनों में दिमागी नक्सलियों ने की घुसपैठ'
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ के बस्तर में सुरक्षा बलों के जवानों से बातचीत के दौरान नक्सलवाद के खिलाफ देश की लड़ाई, सुरक्षा बलों के बलिदान और प्रभावित इलाकों में हुए विकास कार्यों का जिक्र किया।
बस्तर, 8 नवंबर । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ के बस्तर में सुरक्षा बलों के जवानों से बातचीत के दौरान नक्सलवाद के खिलाफ देश की लड़ाई, सुरक्षा बलों के बलिदान और प्रभावित इलाकों में हुए विकास कार्यों का जिक्र किया।
इस दौरान उन्होंने कहा कि जंगलों से हथियारबंद नक्सली खत्म हो चुके हैं लेकिन अब देश के सामने एक नई चुनौती है। दिमागी नक्सलियों ने कई राजनीतिक दलों और अलग-अलग संगठनों में घुसपैठ कर ली है। वे आज भी लोगों को देश के संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ उकसाने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब ऐसे लोगों की पहचान करना, उन्हें तलाशना और देश को सुरक्षित करना है।
पीएम मोदी ने कहा कि माओवादी आतंक और नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई आसान नहीं थी। एक समय देश के करीब 20 राज्यों के 230 से अधिक जिले नक्सलवाद से प्रभावित थे। बिहार, महाराष्ट्र, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ समेत देश का बड़ा हिस्सा वामपंथी उग्रवाद की चपेट में था। हजारों गांवों में रहने वाले करोड़ों लोगों का जीवन इससे प्रभावित था। कई इलाकों में शाम होते ही जनजीवन ठप हो जाता था और लोगों के लिए घरों से बाहर निकलना मुश्किल था। नक्सलियों के डर से लोगों के मतदान करने के अधिकार तक प्रभावित होते थे। एक साल में दो-दो हजार तक नक्सली हमले होते थे।
प्रधानमंत्री ने वर्ष 2010 में दंतेवाड़ा में हुई नक्सली हिंसा का जिक्र करते हुए कहा कि इस क्षेत्र की धरती वीर जवानों और निर्दोष नागरिकों के खून से लाल हुई थी। उस साल नक्सलियों के साथ मुठभेड़ में सीआरपीएफ के 76 जवान शहीद हुए थे। इसी जिले में एक अन्य घटना में 44 निर्दोष नागरिकों की हत्या कर दी गई थी।
उन्होंने कहा कि यह हिंसा कोई इक्का-दुक्का घटना नहीं थी। देश के अलग-अलग हिस्सों में लगभग हर दिन ऐसी घटनाएं होती थीं और दशकों तक यह चुनौती बनी रही। इस दौरान अकेले छत्तीसगढ़ में एक हजार से अधिक सुरक्षाकर्मियों ने अपनी जान गंवाई।
पीएम मोदी ने कहा कि 2004 से 2013 के आंकड़ों पर नजर डालें तो हर साल नक्सलियों के हाथों शहीद होने वाले जवानों की संख्या मारे गए नक्सलियों से अधिक थी। नक्सली संगठनों के मुखिया उस स्थिति को अपनी जीत मानकर जश्न मनाते थे।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आईईडी विस्फोटों में भी कई जवानों को अपने हाथ-पैर गंवाने पड़े। उन्होंने तत्कालीन नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि जब यह धरती वीरों के रक्त से भीग रही थी, तब महलों में रहने वाले नामदारों की ओर से न तो कोई संवेदना दिखाई दी और न ही उनकी आंखों से आंसू निकले।
उन्होंने कहा कि देश को आगे बढ़ाने के लिए उसके दुश्मनों के खिलाफ मजबूत इच्छाशक्ति और सुनियोजित रणनीति के साथ कार्रवाई करना जरूरी है। 2014 में देश की जनता ने उन्हें सेवा का अवसर दिया और इसके बाद नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाई गई। इसके परिणामस्वरूप हालात और आंकड़ों में बदलाव आने लगा।
उन्होंने कहा कि पिछले एक साल में 47 वर्षों में पहली बार ऐसा हुआ कि ड्यूटी के दौरान सीआरपीएफ का एक भी जवान शहीद नहीं हुआ। प्रधानमंत्री ने इसे देश की सही नीतियों और मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति की जीत बताया।
उन्होंने कहा कि जब सरकार राष्ट्र प्रथम की भावना से काम करती है, तो देश की शांति और सुरक्षा मजबूत होती है। इसके साथ ही गरीब और वंचित वर्गों की विकास में भागीदारी भी बढ़ती है। उन्होंने कहा कि बीते 12 वर्षों में देश ने नक्सलवाद और अलगाववाद के खिलाफ लड़ाई के साथ गरीबी के खिलाफ भी बड़ी जीत हासिल की है।
पीएम मोदी ने विश्व बैंक की हालिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत में 50 करोड़ लोग भीषण गरीबी से बाहर निकले हैं। उन्होंने कहा कि दशकों तक गरीबी हटाने के नारे दिए गए, लेकिन जो काम नहीं हो सका, उसे देश ने केवल 12 वर्षों में करके दिखाया। उनके मुताबिक, गरीबी के खिलाफ इस सफलता का एक बड़ा आधार नक्सलवाद और अलगाववाद के खिलाफ देश की लड़ाई भी है।
उन्होंने कहा कि नक्सल प्रभावित इलाकों में उग्रवादियों का पहला एजेंडा विकास को रोकना और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करना था। इसलिए सरकार ने नक्सलवाद के खिलाफ अभियान के साथ-साथ इन क्षेत्रों के विकास के लिए भी विशेष प्रयास किए।
प्रधानमंत्री ने बताया कि वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था के साथ 1,500 किलोमीटर से अधिक सड़कें बनाई गईं। इन इलाकों में 9,500 से ज्यादा मोबाइल टावर लगाए गए। आदिवासी बच्चों की शिक्षा के लिए करीब 200 एकलव्य स्कूल खोले गए। युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए लगभग 50 आईटीआई और 50 कौशल विकास केंद्र शुरू किए गए।
इसके अलावा हजारों डाकघर, बैंक शाखाएं और एटीएम खोले गए। अति पिछड़े आदिवासी इलाकों के विकास के लिए प्रधानमंत्री जनमन योजना शुरू की गई, जिसके माध्यम से हजारों दूरदराज के गांवों तक पहली बार पानी, बिजली और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंचीं।
उन्होंने कहा कि सरकार ने आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को भी समाज की मुख्यधारा में लौटने का अवसर दिया और उनके पुनर्वास के लिए योजनाएं बनाईं। उन्होंने कहा कि सबका साथ, सबका विकास के इस अभियान ने गरीबी के खिलाफ देश की लड़ाई को नई ऊर्जा और विश्वास दिया है।
Source: IANS