आंगनबाड़ी केंद्र 8.9 करोड़ लाभार्थियों को सेवा प्रदान कर रहे: अन्नपूर्णा देवी

नई दिल्ली, 10 अप्रैल। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी के अनुसार, 14 लाख से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों के साथ आंगनबाड़ी दीदियां गर्भवती माताओं, स्तनपान कराने वाली माताओं, किशोरियों और बच्चों तक पहुंच रही हैं। साथ ही, 8.9 करोड़ लाभार्थियों को सेवा प्रदान कर रही हैं। 

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि 'पोषण माह' और 'पोषण पखवाड़ा' ने एक सच्चे 'जन आंदोलन' का रूप ले लिया है, जिसमें देशभर में करोड़ों गतिविधियां हो रही हैं।

केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कहा, "हमारी आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां, आंगनबाड़ी सहायिकाएँ और आशा दीदियाँ प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण और लक्ष्यों को सामूहिक प्रयासों से हर घर तक पहुँचाने में पूरे लगन से लगी हुई हैं। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय का दायित्व व्यापक है और हम देशभर के हर घर और हर बच्चे तक पहुँच रहे हैं।”

उन्होंने कहा, "हमारे बच्चे राष्ट्र का भविष्य हैं और विकसित भारत के संकल्प को आगे बढ़ाएंगे। उन्हें बेहतर पोषण मिले, यह सुनिश्चित करना हम सभी की जिम्मेदारी है, जिसे हमें जन आंदोलन के रूप में मिलकर निभाना होगा।"

उन्होंने राज्यों से एक-दूसरे से सीखने, सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने और उन्हें अनुकूलित करने तथा जिलों, विशेष रूप से आकांक्षी जिलों में बेहतर प्रदर्शन को प्रोत्साहित करने का आग्रह किया।

मंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि 'पोषण' एक सतत प्रक्रिया है और बच्चों के समग्र और मानसिक विकास में सहयोग देने के लिए अधिक समय, देखभाल और सामुदायिक भागीदारी की आवश्यकता पर बल दिया।

इस राष्ट्रीय आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने 'पोषण पखवाड़ा' के 8वें संस्करण का शुभारंभ किया है, जो 9 अप्रैल से 23 अप्रैल तक चलने वाले राष्ट्रव्यापी अभियान की शुरुआत का प्रतीक है।

केंद्रीय मंत्री सावित्री ठाकुर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2018 से अब तक आठ पोषण माह और सात पोषण पखवाड़े आयोजित किए जा चुके हैं। जीवन के पहले छह वर्षों में मस्तिष्क के विकास को अधिकतम करना पर प्रकाश डालते हुए, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह अवधि महत्वपूर्ण है क्योंकि मस्तिष्क का 85 प्रतिशत से अधिक विकास प्रारंभिक वर्षों में होता है, जिसमें पहले 1,000 दिन विशेष रूप से महत्वपूर्ण होते हैं।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि केवल पोषण तक सीमित न रहकर, समग्र बाल विकास सुनिश्चित करने के लिए संवेदनशील देखभाल और प्रारंभिक शिक्षा पर समान रूप से ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।

Source: IANS

अन्य समाचार

Advertisement

Advertisement

Advertisement

Get Newsletter

Advertisement