दिल्ली को बड़ी राहत: 2,574 करोड़ की वजीराबाद जल परियोजना को मिली मंजूरी
दिल्ली की लंबे समय से प्रतीक्षित वजीराबाद जल आपूर्ति सुधार परियोजना ने एक कदम आगे बढ़ाया है। एक अधिकारी ने सोमवार को बताया कि केंद्र सरकार के आर्थिक मामलों के विभाग (डीईए) की स्क्रीनिंग कमेटी ने 2,574 करोड़ रुपए की एशियाई विकास बैंक (एडीबी) समर्थित परियोजना को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है।

नई दिल्ली, 10 अगस्त । दिल्ली की लंबे समय से प्रतीक्षित वजीराबाद जल आपूर्ति सुधार परियोजना ने एक कदम आगे बढ़ाया है। एक अधिकारी ने सोमवार को बताया कि केंद्र सरकार के आर्थिक मामलों के विभाग (डीईए) की स्क्रीनिंग कमेटी ने 2,574 करोड़ रुपए की एशियाई विकास बैंक (एडीबी) समर्थित परियोजना को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है।
दिल्ली के सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि उत्तरी दिल्ली की इस परियोजना की परिकल्पना 2013 में की गई थी, लेकिन इसे फिर से शुरू करने से पहले यह कई वर्षों तक योजना चरण में ही अटकी रही।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की हालिया मंजूरी के साथ अब यह परियोजना कार्यान्वयन की ओर बढ़ रही है। इसमें जल नेटवर्क को आधुनिक बनाने, दक्षता में सुधार करने और निवासियों के लिए अधिक विश्वसनीय आपूर्ति सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि यह परियोजना पूरी जल आपूर्ति श्रृंखला को कवर करेगी, जिसमें ट्रीटमेंट प्लांट और ट्रांसमिशन नेटवर्क से लेकर डिस्ट्रीब्यूशन लाइनें और घरों तक के कनेक्शन शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि दिल्ली के लोगों के लिए पानी रोजमर्रा की जरूरत है। हमारी जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना है कि हर नल के पीछे का बुनियादी ढांचा मजबूत, आधुनिक और विश्वसनीय हो। वजीराबाद परियोजना उस दिशा में एक बड़ा कदम है। हम केवल आज के लिए योजना नहीं बना रहे हैं। हम एक ऐसी जल प्रणाली बना रहे हैं जो दशकों तक दिल्ली की सेवा कर सकेगी।
इस परियोजना के तहत, पुरानी, क्षतिग्रस्त और छोटी पाइपलाइनों को बदला जाएगा, जबकि आवश्यकतानुसार नई ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन लाइनें बिछाई जाएंगी। उन्होंने कहा कि दबाव, वितरण और विश्वसनीयता में सुधार के लिए मौजूदा नेटवर्क को आपस में जोड़ा जाएगा।
उन्होंने यह भी बताया कि वजीराबाद जल शोधन संयंत्र, भूमिगत जलाशय, पंपिंग अवसंरचना और वितरण नेटवर्क का भी उन्नयन किया जाएगा।
घरेलू सेवा कनेक्शनों में सुधार और उन्हें नियमित किया जाएगा। जबकि जिन क्षेत्रों में औपचारिक जल कनेक्शन नहीं हैं, उन्हें भी तकनीकी रूप से संभव होने पर अवसंरचना के विस्तार के साथ नियोजित नेटवर्क में शामिल किया जाएगा।
Source: IANS

