पीएम मोदी की 7 अपीलें भारत को बनाएंगी मजबूत, टिकाऊ विकास को मिलेगा बढ़ावा: एसोचैम

नई दिल्ली, 11 मई । उद्योग संगठन एसोचैम ने सोमवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से की गई सात अपीलें भारत की 'विकसित भारत' यात्रा को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाएंगी।

प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से वैश्विक आर्थिक चुनौतियों, सप्लाई चेन में रुकावट और अंतरराष्ट्रीय संघर्षों के कारण बढ़ती महंगाई से निपटने के लिए सामूहिक सहयोग की अपील की थी। इसके तहत पेट्रोलियम उत्पादों का सोच-समझकर इस्तेमाल करने और फिजूलखर्ची कम करने पर जोर दिया गया, ताकि देश पर वित्तीय बोझ कम हो सके।

एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल के मिंडा ने कहा कि प्रधानमंत्री की ये सात अपीलें अनिश्चित वैश्विक माहौल में भारत की मजबूती, प्रतिस्पर्धा क्षमता और आत्मनिर्भरता बढ़ाने वाले सात मंत्र की तरह हैं।

उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों और रेल परिवहन को बढ़ावा देने से प्रदूषण कम होगा, कनेक्टिविटी बेहतर होगी और लोगों की जिंदगी आसान बनेगी।

मिंडा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की सार्वजनिक परिवहन और मेट्रो यात्रा को प्राथमिकता देने की अपील देश की लॉजिस्टिक्स क्षमता और ईंधन सुरक्षा को मजबूत करेगी।

उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के कम इस्तेमाल और विदेश यात्राओं को घटाने की अपील से विदेशी मुद्रा भंडार की बचत होगी और 'आत्मनिर्भर भारत' मिशन को भी मजबूती मिलेगी।

एसोचैम ने गैर-जरूरी सोने की खरीद कम करने की अपील का भी स्वागत किया।

निर्मल मिंडा ने कहा, "अनिश्चित परिस्थितियों में विदेशी मुद्रा की जरूरतों को पूरा करने में यह कदम मदद करेगा, क्योंकि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने करीब 70 अरब डॉलर का सोना आयात किया था।"

एसोचैम के बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री की ये सात अपीलें देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने, लोगों के कल्याण और वैश्विक स्तर पर भारत की आर्थिक स्थिति को बेहतर करने में मदद करेंगी।

संगठन ने कहा कि भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल है जहां वैश्विक अस्थिरता और 70 दिनों से ज्यादा समय से जारी संघर्ष के बावजूद पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं।

कई देशों में ईंधन की कीमतों में 30 से 70 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है। इसके बावजूद भारत की तेल विपणन कंपनियां रोजाना करीब 1,000 करोड़ रुपए का नुकसान झेल रही हैं।

वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में कंपनियों की अंडर-रिकवरी करीब 2 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गई है, ताकि वैश्विक स्तर पर बढ़ी तेल कीमतों का बोझ आम भारतीय नागरिकों पर न पड़े।

Source: IANS

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