कलकत्ता हाईकोर्ट में पेशी के बाद बीसीआई ने ममता बनर्जी की कानूनी प्रैक्टिस का विवरण मांगा

कोलकाता/नई दिल्ली, 14 मई । बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने पश्चिम बंगाल बार काउंसिल से ममता बनर्जी के पंजीकरण और प्रैक्टिस की स्थिति के बारे में विस्तृत जानकारी मांगी है। दरअसल, पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी गुरुवार को कलकत्ता हाईकोर्ट में वकील के वस्त्र पहनकर राज्य में कथित चुनावोत्तर हिंसा से संबंधित जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई में उपस्थित हुई थीं, जिसके बाद बीसीआई ने यह जानकारी मांगी है।

वकीलों को नियंत्रित करने वाली सर्वोच्च वैधानिक संस्था ने पश्चिम बंगाल राज्य बार काउंसिल के सचिव को लिखे पत्र में निर्देश दिया है कि ममता बनर्जी के पंजीकरण, राज्य अधिवक्ता सूची में उनके नाम की निरंतरता, मुख्यमंत्री के कार्यकाल के दौरान प्रैक्टिस का निलंबन या समाप्ति, और उसके बाद प्रैक्टिस की पुनः शुरुआत से संबंधित रिकॉर्ड दो दिनों के भीतर उपलब्ध कराए जाएं।

विज्ञप्ति में कहा गया कि विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के माध्यम से बार काउंसिल ऑफ इंडिया के संज्ञान में आया है कि पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी आज कलकत्ता हाईकोर्ट के समक्ष अधिवक्ताओं के वस्त्र/कानूनी पोशाक पहनकर उपस्थित हुईं।

वकीलों के पेशेवर आचरण और ड्रेस कोड से संबंधित बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमों का हवाला देते हुए बीसीआई के प्रधान सचिव श्रीरामंतो सेन ने कहा कि ममता बनर्जी द्वारा 2011 से 2026 तक संवैधानिक पद पर रहने के मद्देनजर, राज्य बार काउंसिल द्वारा रखे गए आधिकारिक अभिलेखों से उनकी पंजीकरण, वकालत, निलंबन (यदि कोई हो) और पुनः शुरुआत (यदि कोई हो) की वास्तविक स्थिति का सत्यापन करना आवश्यक है।

बीसीआई ने उनके पंजीकरण संख्या, पंजीकरण की तिथि, क्या उनका नाम अधिवक्ताओं की राज्य सूची में अभी भी दर्ज है, और क्या उन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान वकालत के निलंबन या समाप्ति की सूचना दी थी, सहित विवरण मांगे हैं।

इसमें यह भी पूछा गया कि क्या बाद में वकालत फिर से शुरू करने के लिए कोई आवेदन दायर किया गया था और क्या उनके पक्ष में वर्तमान में कोई वैध वकालत प्रमाण पत्र मौजूद है।

इस पत्र में पश्चिम बंगाल राज्य बार काउंसिल को सभी सहायक अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियां प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया, जिनमें राज्य रोल, नामांकन रजिस्टर, निलंबन या पुनः आरंभ अभिलेख, आवक रजिस्टर, पत्राचार फाइलें और संबंधित फाइल नोटिंग शामिल हैं।

बीसीआई ने आगे निर्देश दिया कि मामले से संबंधित सभी मूल अभिलेखों को उनके वर्तमान स्वरूप में संरक्षित किया जाए और उत्तर प्रस्तुत किए जाने तक अभिलेखों में कोई परिवर्तन, अतिलेखन, प्रक्षेप या पुनर्निर्माण न किया जाए।

यह घटनाक्रम ममता बनर्जी के हाल ही में संपन्न पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के बाद बड़े पैमाने पर हुई हिंसा के आरोपों से संबंधित एक जनहित याचिका के संबंध में मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी सेन की खंडपीठ के समक्ष पेश होने के कुछ घंटों बाद सामने आया।

Source: IANS

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