सत्य निकेतन में एमसीडी की ओर से बिल्डिंग गिराने को लेकर दायर याचिका

नई दिल्ली, 14 सितंबर । दिल्ली हाई कोर्ट ने उस मांग पर जल्द सुनवाई से इनकार कर दिया, जिसमें आरोप लगाया गया है कि दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने सत्य निकेतन में गिरी पीजी इमारत से सटी बिल्डिंग को मलबा हटाए बिना गिरा दिया। याचिका में आशंका जताई गई है कि बिना जांच किए कि अंदर अभी भी लोग फंसे हैं या नहीं, दूसरी बिल्डिंग को गिरा दिया गया।

हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने याचिकाकर्ता से पूछा कि उनकी जानकारी का सोर्स क्या है। कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों ने बिल्डिंग गिराने से पहले जरूर कोई टेक्निकल ऑडिट किया होगा। हाईकोर्ट ने याचिका पर जल्द सुनवाई से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता से याचिका फाइल करने को कहा। कोर्ट ने कहा कि इसे नियम के अनुसार सुनवाई के लिए लिस्ट किया जाएगा।

इससे पहले 9 सितंबर को दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेजों में छात्रों के लिए हॉस्टल की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग को लेकर दाखिल जनहित याचिका (पीआईएल) पर दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार, दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) और दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है।

हाईकोर्ट में दाखिल पीआईएल में सभी संबंधित अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश देने की मांग की गई है कि दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा संचालित सभी कॉलेजों में छात्रों के लिए हॉस्टल की सुविधा उपलब्ध हो। याचिकाकर्ता ने कहा है कि छात्रों को सुरक्षित और पर्याप्त आवास उपलब्ध कराना जरूरी है ताकि उन्हें असुरक्षित निजी पीजी और हॉस्टल में रहने के लिए मजबूर न होना पड़े।

बता दें कि 6 सितंबर को सत्य निकेतन में एक इमारत ढह गई थी। हादसे के बाद एनडीआरएफ, दिल्ली पुलिस, दमकल विभाग, जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव अभियान चलाया। मलबे से कई लोगों को निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया। इस हादसे में 7 लोगों की मौत हो गई थी। मरने वालों में अधिकतर छात्र थे।

Source: IANS

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